JAMMU.जम्मू: जम्मू कश्मीर के मुख्य चुनाव अधिकारी संजीव वर्मा ने आज उपराज्यपाल श्री मनोज सिन्हा से मुलाकात की और 16वें राष्ट्रीय मतदाता दिवस समारोह की तैयारियों पर चर्चा की। जम्मू-कश्मीर में पहली विधानसभा सरकार बने एक साल से ज्यादा वक्त गुजर चुका है, लेकिन यह पूरा साल शासन से ज्यादा सत्ता संघर्ष में खप गया। 2019 में राज्य का दर्जा खत्म होने और केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद सितंबर-अक्टूबर 2024 में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे 8 अक्टूबर को आए थे।
जनता ने लंबे अंतराल के बाद चुनी हुई सरकार से स्थिरता और जवाबदेही की उम्मीद की थी। 16 अक्टूबर 2024 को उमर अब्दुल्ला ने सीएम पद की शपथ ली, लेकिन इसके बाद का पूरा 2025 साल उनके और उपराज्यपाल (एलजी) मनोज सिन्हा के बीच अधिकारों की खींचतान, सचिवालय की लड़ाई और मतदाताओं की रस्साकशी में उलझा रहा। इस टकराव का असर सीधे प्रशासन, अफसरशाही और आम लोगों से जुड़े मुद्दों पर पड़ा। सचिवालय से लेकर जिलों तक सपा के सामने यह असमंजस बना रहा कि वे किसके आदेश को अंतिम रूप दे रहे हैं? जीएसटी सरकार का या एलजी कार्यालय का।