आतंकियों के खिलाफ और तेज होगा खुफिया अभियान

Update: 2026-07-23 11:20 GMT

जम्मू-कश्मीर: उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने श्री अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा निर्देश दिया है। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ खुफिया आधारित अभियानों को और तेज करने को कहा है। उपराज्यपाल ने स्पष्ट किया कि बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुविधा और निर्बाध यात्रा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों को किसी भी संभावित खतरे को समय रहते खत्म करने के लिए पूरी सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं।

खराब मौसम और लगातार बारिश के बीच अमरनाथ यात्रा की व्यवस्थाओं की समीक्षा के लिए बुधवार को एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस, केंद्रीय अर्धसैनिक बलों, नागरिक प्रशासन और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक की अध्यक्षता करते हुए उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने यात्रा मार्ग की सुरक्षा, श्रद्धालुओं की सुविधाओं और आपदा प्रबंधन तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की।

मनोज सिन्हा ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अमरनाथ यात्रा मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आतंकवादी गतिविधियों और संभावित सुरक्षा खतरों को देखते हुए खुफिया तंत्र को और मजबूत किया जाए। सुरक्षा एजेंसियां आपसी तालमेल के साथ काम करें और संदिग्ध गतिविधियों पर लगातार नजर रखें।

उपराज्यपाल ने हाल के खराब मौसम को देखते हुए यात्रा मार्गों पर विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि भारी बारिश, भूस्खलन और अन्य प्राकृतिक आपदाओं की स्थिति में श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए पहले से तैयारी मजबूत होनी चाहिए। इसके लिए बाढ़ सुरक्षा उपायों को बेहतर बनाने, नालों से मलबा हटाने और आपदा प्रबंधन टीमों को चौबीसों घंटे तैयार रखने को कहा गया है।

उन्होंने बिजली, पानी, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य जरूरी सुविधाओं की लगातार निगरानी करने के भी निर्देश दिए। यात्रा मार्ग पर किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त संख्या में एंबुलेंस, ऑक्सीजन सिलेंडर, चिकित्सा सुविधाएं और अतिरिक्त बिजली व्यवस्था उपलब्ध रखने को कहा गया है।

उपराज्यपाल ने बताया कि अमरनाथ यात्रा के शुरुआती 20 दिनों में 3.91 लाख से अधिक श्रद्धालु पवित्र गुफा में बाबा बर्फानी के दर्शन कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि यात्रा का संचालन और दोबारा शुरू करने का फैसला पूरी तरह मौसम की स्थिति और सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए लिया जाएगा।

उन्होंने यात्रा मार्ग पर बिना पंजीकरण वाले सेवा प्रदाताओं पर पूरी तरह रोक लगाने के निर्देश दिए। साथ ही 100 प्रतिशत प्रीपेड सेवा प्रणाली लागू करने को कहा गया, ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। प्रशासन को यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।

बैठक में अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था की मौजूदा स्थिति और भविष्य की रणनीति पर भी चर्चा की। उपराज्यपाल ने सेना, पुलिस, सीएपीएफ और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अमरनाथ यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि जम्मू-कश्मीर की शांति और व्यवस्था का महत्वपूर्ण प्रतीक भी है।

उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। सुरक्षा बल और प्रशासन पूरी जिम्मेदारी के साथ यात्रा को सफल बनाने में जुटे हैं। आतंकवाद और अन्य चुनौतियों से निपटने के लिए सुरक्षा एजेंसियां लगातार सक्रिय रहेंगी।

उच्चस्तरीय बैठक में उत्तरी कमान के जीओसी-इन-सी लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा, जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव अटल डुल्लू, पुलिस महानिदेशक नलिन प्रभात सहित सेना, पुलिस, खुफिया एजेंसियों और श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। प्रशासन का लक्ष्य है कि श्रद्धालु सुरक्षित माहौल में बाबा अमरनाथ के दर्शन कर सकें और यात्रा बिना किसी बाधा के पूरी हो।

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