LOC पर तैनात भारतीय सेना के जवानों ने दिवाली पर मनाई पूजा और प्रार्थना

Update: 2025-10-19 16:49 GMT
Jammu and Kashmir जम्मू-कश्मीर। अखनूर सेक्टर में नियंत्रण रेखा (LOC) पर तैनात भारतीय सेना के जवानों ने दिवाली के पावन अवसर पर विशेष प्रार्थना और पूजा का आयोजन किया। सीमा पर रहने वाले सैनिकों ने अपने परिवारों से दूर रहते हुए भी उत्सव को संजीदगी और श्रद्धा के साथ मनाया। अख़नूर सेक्टर में तैनात जवानों ने अपने कैंप और चौकियों को दीपों और रोशनी से सजाया। इस दौरान सुरक्षा मानकों का पूर्ण पालन करते हुए सीमावर्ती इलाकों में दिवाली की पूजा की गई। जवानों ने अपने साथियों के साथ मिलकर भगवान का ध्यान किया और शांति, सुरक्षा तथा देश की अखंडता की प्रार्थना की। 

सेना अधिकारियों ने बताया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में जवानों का मनोबल बढ़ाने और त्योहार का आनंद लेने के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी। जवानों को पारंपरिक व्यंजन और मिठाइयां उपलब्ध कराई गईं, ताकि वे अपने परिवार से दूर होने के बावजूद त्यौहार का अनुभव ले सकें। इस अवसर पर अधिकारियों ने जवानों से कहा कि सुरक्षा की जिम्मेदारी पहले है, लेकिन त्यौहार को पूरी श्रद्धा और अनुशासन के साथ मनाना भी जरूरी है। जवानों ने दीपों की रोशनी और छोटी-छोटी झांकियों के माध्यम से अपने कैंप को सजाया। 

वहीं, कुछ जवानों ने सीमापार से आने वाले खतरे के प्रति सतर्क रहते हुए रातभर निगरानी भी जारी रखी। सैनिकों ने कहा कि सीमापार की परिस्थितियों के बावजूद, उनका त्योहार मनाने का उत्साह कम नहीं हुआ। दिवाली के इस अवसर पर जवानों ने अपने साथियों के लिए शुभकामनाओं का आदान-प्रदान किया और एक-दूसरे के सुख और समृद्धि की कामना की। सेना ने स्थानीय अधिकारियों के सहयोग से सभी आवश्यक सुरक्षा और स्वास्थ्य उपाय सुनिश्चित किए। जवानों को छोटे-छोटे उपहार भी दिए गए, ताकि उनका मनोबल बढ़े और वे अपने त्यौहार को खुशियों से मनाएं। 

अख़नूर सेक्टर कमांडर ने जवानों को शुभकामनाएं दी और कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि जवान अपने कर्तव्यों के साथ-साथ सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजनों में भी हिस्सा लें। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन जवानों के मनोबल को बनाए रखने और देशभक्ति की भावना को मजबूत करने में मदद करते हैं। इस दिवाली पर सैनिकों की प्रार्थना केवल अपने परिवार और देश की सुरक्षा के लिए नहीं थी, बल्कि पूरे क्षेत्र की शांति, सुरक्षा और सभी नागरिकों के कल्याण के लिए भी की गई। जवानों ने इस अवसर को अपने साथियों के साथ मिलकर यादगार बनाने का प्रयास किया और पारंपरिक रीति-रिवाजों को निभाया।
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