JAMMU.जम्मू: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) में वस्तु एवं सेवा कर (GST) विषय पर एक महत्वपूर्ण कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में देशभर से आए विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, अर्थशास्त्रियों और नीति-निर्माताओं ने हिस्सा लिया और जीएसटी प्रणाली के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने जीएसटी लागू होने के बाद देश की कर व्यवस्था में आए बदलावों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जीएसटी ने कर प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सरल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिससे व्यापार और उद्योग को लाभ मिला है।
कॉन्फ्रेंस में यह भी चर्चा की गई कि जीएसटी व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए तकनीकी सुधार और नीति स्तर पर क्या कदम उठाए जा सकते हैं। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि डिजिटल सिस्टम को और मजबूत किया जाए ताकि कर अनुपालन आसान और तेज हो सके।
IIT के अधिकारियों ने अपने संबोधन में कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक और नीति-आधारित कार्यक्रम छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए अत्यंत उपयोगी होते हैं। इससे उन्हें वास्तविक आर्थिक नीतियों को समझने और शोध कार्यों में नई दिशा प्राप्त करने का अवसर मिलता है।
कार्यक्रम में शामिल अर्थशास्त्रियों ने कहा कि जीएसटी ने राज्यों और केंद्र के बीच कर संरचना को एकीकृत किया है, जिससे देश में व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिला है। हालांकि, कुछ क्षेत्रों में अभी भी सुधार की आवश्यकता बनी हुई है।
विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि छोटे व्यापारियों और सूक्ष्म उद्योगों के लिए जीएसटी प्रक्रिया को और सरल बनाने की जरूरत है, ताकि वे बिना किसी कठिनाई के कर प्रणाली का पालन कर सकें।
कॉन्फ्रेंस के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें छात्रों और शोधकर्ताओं ने जीएसटी से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विशेषज्ञों से सवाल पूछे। इस दौरान कई महत्वपूर्ण सुझाव और विचार सामने आए।
IIT प्रशासन ने बताया कि भविष्य में भी इस तरह के विषय-आधारित सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे, जिससे अकादमिक और नीति जगत के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सके।
इस प्रकार IIT में आयोजित यह कॉन्फ्रेंस जीएसटी प्रणाली पर गहन चर्चा और विचार-विमर्श का एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ, जिसने कर सुधारों की दिशा में नए विचारों को जन्म दिया।