Kashmir.कश्मीर: उच्च न्यायालय ने सरकार को निर्देश दिया है कि कंस्ट्रक्शन और डेवलपमेंट एक्ट तथा संबंधित पंचायती नियमों पर पुनर्विचार किया जाए। अदालत ने कहा कि इन नियमों और एक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन से ही निर्माण कार्यों में पारदर्शिता, सुरक्षा और कानूनी अनुपालन सुनिश्चित किया जा सकता है।
इस दिशा में हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि कई बार अनियमित निर्माण और नियमों की अवहेलना के कारण सार्वजनिक सुरक्षा, पर्यावरण और स्थानीय समुदायों के हितों को खतरा पैदा होता है। अदालत ने सरकार को नियमों और एक्ट में सुधार और स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की सलाह दी।
न्यायालय ने कहा कि पंचायती नियम और डेवलपमेंट एक्ट केवल कानूनी प्रावधान नहीं हैं, बल्कि उनका उद्देश्य स्थानीय स्तर पर उचित और सुरक्षित निर्माण सुनिश्चित करना है। अदालत ने सरकार से यह सुनिश्चित करने को कहा कि नियमों का क्रियान्वयन हर स्तर पर समान और प्रभावी हो।
विशेष रूप से हाईकोर्ट ने यह भी सुझाव दिया कि स्थानीय निकायों और पंचायती संस्थाओं के प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण पर ध्यान दिया जाए, ताकि वे कंस्ट्रक्शन और डेवलपमेंट से जुड़े मामलों में सही और पारदर्शी निर्णय ले सकें। अदालत ने यह भी कहा कि नियमों में अस्पष्टता और कार्यान्वयन में लापरवाही लोगों के लिए जोखिम और विवाद पैदा कर सकती है।
सरकार से कहा गया है कि वर्तमान पंचायती नियमों और डेवलपमेंट एक्ट का एक व्यापक मूल्यांकन किया जाए और आवश्यक संशोधन करके निर्माण गतिविधियों की निगरानी और नियमन को मजबूत किया जाए। अदालत ने यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि नए नियम और दिशानिर्देश सार्वजनिक हित, पर्यावरण और सुरक्षा मानकों के अनुरूप हों।
इस निर्णय के बाद विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम निर्माण उद्योग में पारदर्शिता बढ़ाने और कानूनी प्रक्रियाओं को सरल बनाने में मदद करेगा। इसके साथ ही यह स्थानीय समुदायों और हितधारकों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।