महबूबा मुफ्ती के खिलाफ एफआईआर

Update: 2024-05-30 02:08 GMT
श्रीनगर: कश्मीर में चुनाव अधिकारियों ने पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती के खिलाफ आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करने के आरोप में एफआईआर दर्ज की है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि महबूबा के खिलाफ धारा 144 का उल्लंघन करने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है। महबूबा और उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले के बिजबेहरा इलाके में विरोध प्रदर्शन किया था। पीडीपी अध्यक्ष ने अपने खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने को 'मनोरंजक' बताया। उन्होंने कहा, 'मेरे खिलाफ आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करने के लिए एफआईआर दर्ज होना मनोरंजक है। सत्ता के सामने सच बोलने की कीमत पीडीपी को चुकानी पड़ी है।
हमारा विरोध स्थानीय प्रशासन के साथ मिलीभगत कर मतदान से कुछ घंटे पहले पीडीपी के सैकड़ों पोलिंग एजेंटों और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेने के खिलाफ था।' 'अभी भी संतुष्ट नहीं होने पर उसी प्रशासन ने हमारे मतदाताओं को आतंकित करने और उन्हें वोट देने के अधिकार का प्रयोग करने से रोकने के लिए पारंपरिक पीडीपी के गढ़ वाले इलाकों में घेराबंदी और तलाशी अभियान शुरू कर दिया। महबूबा ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, उल्टा चोर कोतवाल को डांटे। पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री ने शनिवार को जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले में एक पुलिस स्टेशन के बाहर विरोध प्रदर्शन किया, जबकि लोकसभा चुनाव के छठे चरण में अनंतनाग-राजौरी संसदीय सीट पर मतदान चल रहा था। वह अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं और मतदान एजेंटों की कथित हिरासत के खिलाफ विरोध कर रही थीं। अधिकारियों ने कहा कि विरोध एमसीसी का "घोर उल्लंघन" था।
एफआईआर में कहा गया है, "पीडीपी कार्यकर्ताओं के विशाल समूह ने मुख्य सड़क को भी अवरुद्ध कर दिया और मुख्य स्टॉप बिजबेहरा में एक घंटे से अधिक समय तक विरोध प्रदर्शन किया, जो निर्वाचन क्षेत्र में लागू धारा 144 सीआरपीसी का उल्लंघन है।" चुनाव अधिकारियों ने निर्वाचन क्षेत्र में मतदान के मद्देनजर और लोकतांत्रिक सिद्धांतों की पवित्रता को बनाए रखने के लिए 23 मई को शाम 6 बजे से 25 मई को शाम 6 बजे तक धारा 144 सीआरपीसी के तहत निषेधाज्ञा लागू की थी। निषेधाज्ञा में भारतीय दंड संहिता की धारा 144 के तहत गैरकानूनी ढंग से एकत्र होने तथा कानून एवं व्यवस्था की समस्या को रोकने के लिए किसी भी प्रकार के जुलूस या रैली पर प्रतिबंध लगाया गया है।
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