जम्मू-कश्मीर की पर्वतीय नीति का मसौदा तैयार, पर्यटन में वहन क्षमता पर जोर
वैष्णो देवी-अमरनाथ यात्रा पर नई सीमा?
जम्मू: जम्मू-कश्मीर में पर्वतीय क्षेत्रों के विकास और पर्यावरण संरक्षण के लिए नई नीति का मसौदा तैयार किया गया है। प्रस्तावित ‘जम्मू-कश्मीर सतत पर्वतीय विकास नीति’ में पर्यटन गतिविधियों को संबंधित क्षेत्र की वहन क्षमता के अनुरूप रखने पर जोर है। हालांकि, वैष्णो देवी और अमरनाथ सहित ठीक 15 स्थलों पर श्रद्धालुओं की नई संख्या-सीमा लागू होने की पुष्टि उपलब्ध स्रोतों से नहीं हुई है। इसलिए प्रस्तावित नीति को तत्काल लागू यात्रा प्रतिबंध के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
प्रकाशित जानकारी के अनुसार, नीति का पहला मसौदा इंटीग्रेटेड माउंटेन इनिशिएटिव और शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कश्मीर ने संयुक्त रूप से तैयार किया है। अक्टूबर में आयोजित सतत पर्वतीय विकास सम्मेलन में इस पर चर्चा हुई। मसौदे में विशेषज्ञों और विभिन्न पक्षों के सुझाव शामिल करने की प्रक्रिया का भी उल्लेख है।
नीति में पर्वतीय संवेदनशीलता के आधार पर चार श्रेणियों, विभागों के बीच बेहतर समन्वय और पर्यटन को वहन क्षमता के भीतर रखने जैसे प्रस्ताव बताए गए हैं। इसके साथ एक प्रस्तावित ग्रीन माउंटेन सेस का भी उल्लेख है। ये मसौदे के प्रावधान हैं; इनके आधार पर किसी नए शुल्क या प्रवेश सीमा को लागू मान लेना उचित नहीं होगा। अंतिम व्यवस्था सक्षम स्तर से मंजूरी और संबंधित अधिसूचना के बाद स्पष्ट होगी।
वहन क्षमता का सामान्य अर्थ किसी स्थल पर गतिविधियों का ऐसा स्तर है, जिसे वहां का पर्यावरण और उपलब्ध व्यवस्थाएं संभाल सकें। इसे केवल प्रतिदिन आने वाले लोगों की संख्या तक सीमित नहीं समझना चाहिए। पानी, कचरा प्रबंधन, रास्तों और अन्य सुविधाओं पर पड़ने वाला दबाव भी इस चर्चा का हिस्सा होता है। प्रस्तावित नीति में पर्यावरणीय क्षमता के साथ जिम्मेदार पर्यटन, सुरक्षित बुनियादी ढांचे, जलस्रोतों और आपदा जोखिम में कमी जैसे विषय शामिल हैं।
धार्मिक यात्राओं के संदर्भ में नई पर्वतीय नीति और पहले से लागू यात्रा प्रबंधन नियमों के बीच अंतर रखना जरूरी है। अमरनाथ यात्रा में पंजीकरण और निर्धारित तारीख के अनुसार यात्रियों को आगे भेजने की व्यवस्था पहले से है। जुलाई 2026 की सरकारी विज्ञप्ति में प्रशासन ने स्पष्ट किया था कि यात्रा मार्गों पर आवागमन निर्धारित सीमा और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप कराया जा रहा है।
उसी विज्ञप्ति में बिना वैध पंजीकरण पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के कारण प्रतीक्षा बढ़ने का उल्लेख था। प्रशासन ने निर्धारित तारीख का पंजीकरण रखने वाले यात्रियों को ही मार्ग पर आगे बढ़ने की अनुमति देने की बात कही थी। यह मौजूदा अमरनाथ यात्रा प्रबंधन से संबंधित जानकारी है और इसे नई पर्वतीय नीति के तहत घोषित किसी साझा सीमा का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
नई नीति की चर्चा का व्यापक उद्देश्य पहाड़ों में विकास और संरक्षण के बीच संतुलन बनाना है। सम्मेलन में जिम्मेदार विकास, स्थानीय समुदायों की भागीदारी और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा पर जोर दिया गया। पर्यटन से आजीविका कमाने वाले लोगों के हितों को भी नीति निर्माण की प्रक्रिया में महत्व देने की बात सामने आई है।
श्रद्धालुओं के लिए फिलहाल महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी स्थल की यात्रा योजना संबंधित श्राइन बोर्ड और प्रशासन की आधिकारिक सूचना के आधार पर बनाएं। नई दैनिक सीमा, पंजीकरण प्रक्रिया में बदलाव या शुल्क के बारे में अलग आदेश आने पर ही उसे लागू व्यवस्था माना जाए। उपलब्ध जानकारी पर्वतीय नीति के मसौदे और वहन क्षमता आधारित पर्यटन के प्रस्ताव की पुष्टि करती है, लेकिन 15 स्थलों की सूची तथा उनके लिए निर्धारित नई संख्या का पुष्ट विवरण सामने नहीं आया है।