श्रीनगर : जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर-लेह बाइपास पर कथित तौर पर नियमों को दरकिनार कर हो रहे निर्माण कार्यों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क के आसपास लागू 100 मीटर निर्माण प्रतिबंध के बावजूद कई जगहों पर कॉम्प्लेक्स और व्यावसायिक भवन बनाए जा रहे हैं। लोगों ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि क्या नियम सिर्फ गरीब और आम लोगों के लिए हैं।

श्रीनगर-लेह मार्ग सामरिक और पर्यटन की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस क्षेत्र में सड़क संपर्क को बेहतर बनाने के लिए कई बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट चल रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर सड़क किनारे अनियंत्रित निर्माण को लेकर पर्यावरण और यातायात सुरक्षा से जुड़े सवाल भी उठ रहे हैं।
100 मीटर नियम पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों के मुताबिक, बाइपास के दोनों ओर निर्धारित दूरी के भीतर निर्माण पर रोक के नियम हैं, लेकिन इसके बावजूद कुछ स्थानों पर व्यावसायिक गतिविधियां शुरू हो रही हैं। लोगों का कहना है कि छोटे निर्माण या आम लोगों के मकानों पर नियमों का हवाला देकर कार्रवाई की जाती है, जबकि बड़े कॉम्प्लेक्स बनने पर प्रशासन की चुप्पी सवाल खड़े करती है। लोगों ने मांग की है कि प्रशासन सभी निर्माणों की एक समान जांच करे और अगर कोई नियमों का उल्लंघन कर रहा है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए।
बढ़ते निर्माण से यातायात पर खतरा
श्रीनगर-लेह बाइपास जैसे महत्वपूर्ण मार्ग पर बढ़ते व्यावसायिक निर्माण से भविष्य में यातायात दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि हाईवे और बाइपास के आसपास अनियोजित निर्माण से सड़क सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा पार्किंग, अतिक्रमण और भीड़भाड़ जैसी समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं। ऐसे क्षेत्रों में निर्माण की अनुमति देने से पहले लंबी अवधि की योजना जरूरी मानी जाती है।
प्रशासन की भूमिका पर सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर निर्माण नियमों के खिलाफ हो रहे हैं तो संबंधित विभागों को समय रहते कार्रवाई करनी चाहिए थी। उनका आरोप है कि प्रभावशाली लोगों के मामलों में नियमों को नजरअंदाज किया जा रहा है। हालांकि प्रशासन की ओर से किसी भी अवैध निर्माण की पुष्टि या कार्रवाई को लेकर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। मामले की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
विकास और नियमों के बीच संतुलन जरूरी
श्रीनगर-लेह मार्ग क्षेत्र में विकास कार्य जरूरी हैं, लेकिन इसके साथ पर्यावरण, सुरक्षा और नियोजन के नियमों का पालन भी उतना ही महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर कनेक्टिविटी के साथ नियंत्रित विकास ही लंबे समय तक क्षेत्र के हित में रहेगा। अब लोगों की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है कि क्या बाइपास क्षेत्र में हो रहे निर्माणों की जांच होगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।

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