Jammu जम्मू,  केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवान मुनीर अहमद, जिन्हें 3 मई को एक पाकिस्तानी नागरिक के साथ अपनी शादी के बारे में बल को अंधेरे में रखने के आरोप में सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था, ने रविवार को आरोपों से इनकार किया और "न्याय के लिए प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री से हस्तक्षेप करने" की मांग की। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में, मुनीर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से सीआरपीएफ से उनकी बर्खास्तगी के मामले में हस्तक्षेप करने और उन्हें न्याय दिलाने की अपील की। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने संगठन (सीआरपीएफ) को पाकिस्तानी नागरिक और अपनी ममेरी बहन मीनल खान के साथ अपनी शादी के बारे में सूचित करने सहित सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर ली थीं।
मुनीर ने कहा, "इसलिए तथ्यों को छिपाकर राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता करने का यह आरोप सच्चाई से कोसों दूर है क्योंकि मैंने बल को अपनी शादी के बारे में सूचित किया था।" उन्होंने कहा, "मेरा परिवार पिछली कई पीढ़ियों से जम्मू जिले के भलवाल तहसील के हंदवाल गांव में रह रहा है। हमने 1947 में जम्मू नहीं छोड़ा, जबकि मेरे मामा की बेटी मीनल का परिवार पाकिस्तान चला गया। हमारे विवाह का फैसला हमारे माता-पिता ने बचपन में ही कर दिया था। 2022 में मैंने सीआरपीएफ अधिकारियों को मीनल, जो एक पाकिस्तानी नागरिक है, से विवाह करने के अपने इरादे के बारे में बताया और इसके लिए अनुमति मांगी।" उन्होंने कहा कि उन्होंने 5 नवंबर, 2023 को विवाह के लिए मंजूरी मांगने के लिए 18 अक्टूबर, 2023 के अपने पत्र के माध्यम से सभी आवश्यक दस्तावेज जमा कर दिए हैं। मुनीर ने मीडियाकर्मियों से कहा, "30 अप्रैल, 2024 को अपने संगठन से अनुमति मिलने के बाद, मैंने पिछले साल मई में ऑनलाइन विवाह किया, क्योंकि मेरे पिता कैंसर रोगी हैं और मीनल को वीजा नहीं मिल सका। मैंने विवाह के बाद की औपचारिकताएं भी पूरी कीं और अपने संगठन को सूचित किया।
मैंने अपने संगठन को अंधेरे में नहीं रखा, इसलिए यह बर्खास्तगी मेरे लिए एक झटका है।" मुनीर के अनुसार, शादी के बाद मीनल इस साल फरवरी में भारत आई और उसने लॉन्ग टर्म वीजा के लिए आवेदन किया। उन्होंने कहा, "लगभग सभी आवश्यकताएं पूरी हो गई थीं और इसीलिए हमें इस सप्ताह की शुरुआत में जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय से स्थगन मिल गया। हम न्याय के लिए फिर से अदालत का रुख करेंगे।" मीनल का केस लड़ने वाले और पाकिस्तान भेजे जाने पर जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय से सफलतापूर्वक स्थगन लाने वाले भाजपा प्रवक्ता और अधिवक्ता अंकुर शर्मा ने दोहराया कि गृह मंत्रालय के आदेश में दो तरह के लोगों को छूट दी गई थी, एक - राजनयिक वीजा धारक और दूसरे लॉन्ग टर्म वीजा धारक। शर्मा ने कहा, "मीनल लॉन्ग टर्म वीजा के लिए साक्षात्कार के लिए उपस्थित हुई थी और उसे लॉन्ग टर्म वीजा देने के लिए गृह मंत्रालय को सकारात्मक सिफारिशें भेजी गई थीं। हमें उसके मामले में अदालत के माध्यम से गृह मंत्रालय के आदेश का अक्षरशः क्रियान्वयन मिला।"
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