मां वैष्णो देवी के दर्शन को उमड़े भक्त, सालाना यात्रा में बड़े आंकड़े की उम्मीद
साल के अंत तक एक करोड़ भक्तों की उम्मीद
कटड़ा: मां वैष्णो देवी के दरबार में श्रद्धालुओं की आवाजाही के बीच इस वर्ष यात्रियों की संख्या एक करोड़ तक पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है। उपलब्ध कराए गए विवरण के अनुसार, पहले दस महीनों में 83.20 लाख श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे हैं। हालांकि, इस संख्या की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं हो सकी है। इसलिए दस महीने के कुल आंकड़े को श्राइन बोर्ड की अद्यतन सूचना से मिलाना जरूरी है।
इस बीच, अक्टूबर में नवरात्र के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की पुष्टि प्रकाशित रिपोर्टों से होती है। समाचार एजेंसी भाषा की 19 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, 11 अक्टूबर से शुरू हुए शारदीय नवरात्र के दौरान उस समय तक 3.81 लाख से अधिक श्रद्धालु माता के दर्शन कर चुके थे। इससे त्योहार के दौरान यात्रा में श्रद्धालुओं की अच्छी भागीदारी का संकेत मिलता है। दस महीने में 83.20 लाख यात्रियों का आंकड़ा सही होने की स्थिति में एक करोड़ तक पहुंचने के लिए शेष दो महीनों में 16.80 लाख और यात्राएं दर्ज होनी होंगी। नवंबर और दिसंबर के कुल 61 दिनों के आधार पर इसके लिए औसतन प्रतिदिन लगभग 27,541 यात्रियों की जरूरत होगी। यह केवल दिए गए आंकड़े पर आधारित गणना है। वास्तविक संख्या आने वाले दिनों में यात्रियों की आवाजाही पर निर्भर करेगी।
एक करोड़ श्रद्धालुओं तक पहुंचने की संभावना और अब तक का सर्वाधिक रिकॉर्ड बनने का दावा अलग-अलग बातें हैं। श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड की वेबसाइट पर उपलब्ध सालाना यात्रा आंकड़ों में वर्ष 2012 के लिए 104.95 लाख यात्राएं दर्ज हैं। इसलिए केवल एक करोड़ का आंकड़ा छू लेने से उस ऐतिहासिक स्तर का रिकॉर्ड नहीं टूटेगा। नया सर्वाधिक रिकॉर्ड बताने के लिए अंतिम सालाना संख्या का पिछले सभी वर्षों से मिलान आवश्यक होगा। मां वैष्णो देवी का धाम जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में स्थित है। श्रद्धालु त्रिकुटा पहाड़ियों पर स्थित पवित्र गुफा में दर्शन के लिए पहुंचते हैं। यात्रा का प्रमुख आधार स्थल कटड़ा है। देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले लोगों के लिए यहां पहुंचना धार्मिक आस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण अवसर होता है। परिवारों और समूहों के साथ आने वाले श्रद्धालुओं के कारण त्योहारों के समय यात्रा की मांग विशेष रूप से बढ़ सकती है।
इस वर्ष यात्रा के शुरुआती महीनों में भी श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या सामने आई थी। जून में प्रकाशित अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, पहले पांच महीनों में 40 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे थे। उसी रिपोर्ट में वर्ष के अंत तक यात्रा के बड़े स्तर पर पहुंचने की संभावना जताई गई थी। हालांकि, किसी भी शुरुआती रुझान से पूरे साल का अंतिम परिणाम तय नहीं किया जा सकता। इसके लिए सभी महीनों के वास्तविक आंकड़ों की जरूरत होती है। श्रद्धालुओं की संख्या के साथ यात्रा प्रबंधन भी महत्वपूर्ण विषय है। पंजीकरण, मार्ग पर आवाजाही और दर्शन के लिए कतारों का संचालन यात्रियों के अनुभव को प्रभावित करता है। अधिक भीड़ के समय लोगों को उपलब्ध व्यवस्थाओं और अधिकृत निर्देशों के अनुसार आगे बढ़ना चाहिए। सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाले पुराने वीडियो या बिना तारीख की सूचनाओं के आधार पर मौजूदा भीड़ का अनुमान लगाना उचित नहीं होगा।
नवरात्र के दौरान दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए विशेष सुविधाओं की जानकारी भी सामने आई थी। भाषा की रिपोर्ट के अनुसार, इनमें निःशुल्क घोड़ा और बैटरी चालित वाहन सेवा, प्राथमिकता के आधार पर दर्शन तथा सहायता केंद्र शामिल थे। ऐसी सुविधाओं का लाभ लेने की योजना बना रहे यात्रियों को संबंधित पात्रता, उपलब्धता और प्रक्रिया की जानकारी यात्रा से पहले अधिकृत माध्यम से लेनी चाहिए। किसी विशेष अवधि की व्यवस्था को पूरे वर्ष समान रूप से लागू मानना सही नहीं होगा।
नवंबर-दिसंबर में यात्रा की योजना बनाते समय मौसम और पहाड़ी मार्ग की परिस्थितियों का ध्यान रखना उपयोगी होगा। यात्रियों को प्रस्थान से पहले ताजा अधिकृत सूचना देखनी चाहिए और ठहरने तथा परिवहन की बुकिंग का विवरण जांच लेना चाहिए। परिवार में बुजुर्ग, बच्चे या स्वास्थ्य संबंधी जरूरत वाले सदस्य हों तो यात्रा का समय और व्यवस्था उनकी सुविधा के अनुसार तय करना बेहतर रहेगा। फिलहाल एक करोड़ यात्रियों की संख्या तक पहुंचना एक संभावना है। दस महीने के 83.20 लाख के आंकड़े की आधिकारिक पुष्टि और आगामी दो महीनों की यात्रा संख्या मिलने के बाद वर्ष की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी। खबर में भी इसी अंतर को बनाए रखना जरूरी है—श्रद्धालुओं की बड़ी भागीदारी का उल्लेख किया जा सकता है, जबकि नया ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनने की घोषणा अंतिम और तुलनीय आंकड़ों के आधार पर ही की जानी चाहिए।