Ladakh गुरुवार को लेह में लद्दाख के नेताओं और केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) के अधिकारियों के बीच बातचीत का एक नया दौर हुआ था। इसके एक दिन बाद, शुक्रवार को इन दोनों समूहों ने केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए मसौदे को खारिज कर दिया। लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) ने गुरुवार को ही केंद्र द्वारा पेश किए गए मसौदे पर असंतोष जताया था।
बातचीत का अगला दौर 22 अक्टूबर को नई दिल्ली में होना तय हुआ है। LAB के चेयरमैन शेरिंग दोरजे लकरुक ने 'द ट्रिब्यून' को बताया कि एक बैठक के बाद, दोनों समूहों ने गृह मंत्रालय के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। KDA के सह-अध्यक्ष असगर अली करबलाई ने लेह में पत्रकारों से कहा कि गृह मंत्रालय मई में हुई बातचीत में तय की गई बातों से "पीछे हट गया है"।
उन्होंने कहा कि गृह मंत्रालय द्वारा पेश किया गया प्रस्ताव लद्दाख को मंजूर नहीं है। करबलाई ने कहा, "कल हमें जो प्रस्ताव दिया गया, उसमें एक ऐसी संस्था बनाने की बात है जो मौजूदा काउंसिल के अधीन होगी।" उन्होंने आगे कहा कि "इस तरह पीछे हटना कोई अच्छा संकेत नहीं है।"
करबलाई ने लद्दाख के उपराज्यपाल (LG) और मुख्य सचिव पर यह आरोप भी लगाया कि वे लद्दाख की परियोजनाओं को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहे हैं और प्रधानमंत्री के सामने भी इन्हें इसी तरह रख रहे हैं। यह बातचीत 9 सितंबर को नई दिल्ली में हुई चर्चा के बाद हुई है। उस समय LAB और KDA ने इसे "बेनतीजा" (non-starter) करार दिया था, क्योंकि लद्दाख से जुड़े मुद्दों पर कोई ठोस प्रगति नहीं हुई थी। मई में हुई बातचीत के दौरान, केंद्र और लद्दाख के समूहों के बीच एक सैद्धांतिक सहमति बनी थी। इसके तहत, केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख को अनुच्छेद 371A, 371F और 371G की तर्ज पर संवैधानिक सुरक्षा देने की बात थी—ये अनुच्छेद क्रमशः नागालैंड, सिक्किम और मिजोरम को विशेष सुरक्षा प्रदान करते हैं। सितंबर की बातचीत की आलोचना होने के बाद, लद्दाख के मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा ने क्षेत्र के नेताओं से सकारात्मक बने रहने की अपील की थी। उन्होंने जनता को भरोसा दिलाया कि केंद्र शासित प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण मुद्दों पर प्रगति हो रही है।
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