Palampur चौधरी सरवन कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर ने 'स्टूडेंट्स वेलफेयर ऑर्गनाइज़ेशन' के तहत 'विकसित भारत युवा संवाद' का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य राष्ट्र-निर्माण में युवाओं की भूमिका, सामाजिक ज़िम्मेदारी और विकसित भारत के विज़न को साकार करने में उनकी सक्रिय भागीदारी पर चर्चा करना था। CSIR-हिमालयन बायो-रिसोर्स टेक्नोलॉजी संस्थान (CSIR-IHBT) के निदेशक प्रो. एस.के. यादव ने छात्रों को संबोधित करते हुए देश के विकास में युवाओं की सक्रिय और रचनात्मक भूमिका के महत्व पर ज़ोर दिया। उन्होंने छात्रों से ज्ञान, इनोवेशन, अनुशासन और सामाजिक ज़िम्मेदारी के माध्यम से राष्ट्र-निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।
मुख्य वक्ता, केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश (धर्मशाला) के संस्कृत विभाग के प्रमुख डॉ. योगेंद्र प्रताप धामा ने 'विकसित भारत' के निर्माण में युवाओं की भूमिका पर छात्रों के साथ एक इंटरैक्टिव सत्र आयोजित किया। उन्होंने युवाओं से अपने जीवन में 'पंच परिवर्तन' — सामाजिक सद्भाव, पारिवारिक जागरूकता, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी प्रथाओं और नागरिक कर्तव्यों — को अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि युवा देश का भविष्य हैं और राष्ट्र के समग्र विकास के लिए उनकी सक्रिय और रचनात्मक भागीदारी बहुत ज़रूरी है।
इस कार्यक्रम में 150 से अधिक विश्वविद्यालय के छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और राष्ट्र-निर्माण, युवा शक्ति, सामाजिक ज़िम्मेदारी और विकसित भारत के विज़न के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार साझा किए। इस बातचीत ने छात्रों को युवाओं की भूमिका और देश के समग्र विकास में उनके योगदान पर विचार-विमर्श करने का अवसर दिया। इस अवसर पर कमल देव, राजन कटोच, अंजलि सूद, राकेश चौहान और अजीत कुमार सहित अन्य लोग भी मौजूद थे।
स्टूडेंट्स वेलफेयर ऑफिसर प्रो. जय देव ने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए अतिथियों, वक्ताओं, आयोजकों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि देश के युवा, जिन्हें "370 मिलियन ग्रोथ इंजन" कहा जाता है, विकसित भारत के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं। उन्होंने युवाओं की ऊर्जा, प्रतिभा और रचनात्मकता को राष्ट्र-निर्माण की दिशा में लगाने की आवश्यकता पर भी ज़ोर दिया।