Himachal Pradesh: मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने राज्य के कई हिस्सों में अगले छह दिनों तक भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना जताई है। लगातार बारिश के कारण भूस्खलन (Landslide), फ्लैश फ्लड, सड़क अवरुद्ध होने और नदियों-नालों के उफान का खतरा बढ़ गया है।

मौसम विभाग ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने, नदी-नालों के किनारे न जाने और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
अगले छह दिन कैसा रहेगा मौसम?
मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से लगातार नमी मिलने के कारण हिमाचल प्रदेश में मानसूनी गतिविधियां तेज बनी रहेंगी। इससे कई जिलों में रुक-रुककर तेज बारिश के साथ कुछ स्थानों पर मूसलाधार वर्षा होने की संभावना है।
बारिश का यह दौर अगले छह दिनों तक जारी रह सकता है। ऊंचाई वाले इलाकों में भी लगातार वर्षा होने से भूस्खलन और चट्टानें गिरने की घटनाएं बढ़ सकती हैं।
किन जिलों में ज्यादा असर पड़ सकता है?
भारी बारिश का असर मुख्य रूप से निम्न जिलों में देखने को मिल सकता है—
शिमला
मंडी
कुल्लू
कांगड़ा
चंबा
सोलन
सिरमौर
हमीरपुर
बिलासपुर
ऊना
किन्नौर के कुछ हिस्से
लाहौल-स्पीति के संवेदनशील क्षेत्र
इन इलाकों में तेज बारिश के साथ बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने की भी संभावना जताई गई है।
भूस्खलन और फ्लैश फ्लड का खतरा
लगातार बारिश के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में मिट्टी कमजोर हो जाती है, जिससे भूस्खलन की घटनाएं बढ़ जाती हैं। कई राष्ट्रीय और राज्य राजमार्ग प्रभावित हो सकते हैं।
विशेष रूप से—
पहाड़ी सड़कों पर पत्थर गिर सकते हैं।
छोटे पुलों और नालों में जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है।
निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन सकती है।
अचानक बाढ़ (Flash Flood) का खतरा बढ़ सकता है।
पर्यटकों के लिए भी एडवाइजरी
हिमाचल इस समय बड़ी संख्या में पर्यटकों की मेजबानी कर रहा है। ऐसे में प्रशासन ने पर्यटकों से भी अतिरिक्त सतर्कता बरतने की अपील की है।
यदि आप हिमाचल घूमने जा रहे हैं तो—
मौसम का अपडेट देखकर ही यात्रा करें।
रात में पहाड़ी मार्गों पर यात्रा करने से बचें।
नदी, झरनों और नालों के पास फोटो खिंचवाने का जोखिम न लें।
स्थानीय प्रशासन की सलाह का पालन करें।
किसानों के लिए क्या असर?
लगातार बारिश से खरीफ फसलों को जहां कुछ क्षेत्रों में लाभ मिल सकता है, वहीं अत्यधिक वर्षा से खेतों में जलभराव और फसलों को नुकसान की आशंका भी बढ़ गई है।
विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि—
खेतों से पानी की निकासी की व्यवस्था रखें।
बागवानी क्षेत्रों में जलभराव न होने दें।
तेज बारिश के दौरान कीटनाशक या उर्वरकों का छिड़काव टालें।
सड़क और यातायात पर असर
भारी बारिश के कारण कई पहाड़ी मार्गों पर यातायात प्रभावित हो सकता है। भूस्खलन की वजह से सड़कें बंद होने और लंबा जाम लगने की आशंका बनी हुई है।
यात्रियों को सलाह दी गई है कि—
यात्रा से पहले सड़क की स्थिति की जानकारी लें।
आवश्यक सामान और दवाइयां साथ रखें।
वाहन सावधानी से चलाएं और तेज गति से बचें।
प्रशासन पूरी तरह सतर्क
राज्य सरकार और जिला प्रशासन ने आपदा प्रबंधन टीमों को अलर्ट पर रखा है। संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है और राहत एवं बचाव दलों को तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।
जहां जरूरत होगी वहां—
सड़कें जल्द खोलने के लिए मशीनें तैनात रहेंगी।
राहत शिविर तैयार रखे जाएंगे।
बिजली और पेयजल व्यवस्था पर लगातार नजर रखी जाएगी।
लोगों के लिए जरूरी सावधानियां
भारी बारिश के दौरान इन बातों का विशेष ध्यान रखें—
अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलें।
नदी, नाले और झरनों के पास जाने से बचें।
मौसम विभाग की चेतावनियों पर नजर रखें।
बिजली कड़कने के दौरान खुले स्थानों पर खड़े न हों।
मोबाइल फोन चार्ज रखें और जरूरी नंबर अपने पास रखें।
किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन से तुरंत संपर्क करें।
मौसम विभाग की सलाह
IMD ने स्पष्ट किया है कि भारी बारिश के दौरान लोगों को अफवाहों से बचना चाहिए और केवल आधिकारिक मौसम बुलेटिन तथा प्रशासन की सूचना पर भरोसा करना चाहिए।
यदि किसी क्षेत्र में रेड या ऑरेंज अलर्ट जारी किया जाता है तो वहां अनावश्यक यात्रा से बचना सबसे सुरक्षित विकल्प होगा।
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