हिमाचल प्रदेश में बनी दवाओं के लगभग 29 प्रतिशत सैंपल, जो सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) के हालिया मासिक अलर्ट में शामिल हैं, गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं। इससे राज्य में दवाओं की गुणवत्ता नियंत्रण (क्वालिटी कंट्रोल) को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ गई हैं। सितंबर के लिए जारी राष्ट्रीय अलर्ट में शामिल 330 सैंपलों में से 95 सैंपल हिमाचल की 70 दवा इकाइयों (फार्मास्युटिकल यूनिट्स) में बने थे। इनमें 48 टैबलेट, 20 ओरल लिक्विड (जैसे सिरप और सस्पेंशन), ​​14 इंजेक्शन और IV फ्लूइड, तथा 5 कैप्सूल और सॉफ्ट जेल शामिल थे।
इन 95 सैंपलों में से 70 सैंपल महत्वपूर्ण गुणवत्ता मानकों (जैसे 'एसे', 'डिसोल्यूशन' और 'पार्टिकुलेट मैटर' की मौजूदगी) पर फेल हो गए। इसके अलावा, 22 सैंपलों में छोटी-मोटी कमियां पाई गईं, जिनमें लेबलिंग से जुड़ी खामियां भी शामिल थीं। इंजेक्शन वाली दवाओं में 'पार्टिकुलेट मैटर' (कणों की मौजूदगी) का मिलना विशेष रूप से चिंताजनक है, क्योंकि ऐसी कमियां गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकती हैं और मरीजों की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती हैं। नियामक कार्रवाई के बावजूद, बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ औद्योगिक क्षेत्र और पोंटा साहिब की दवा इकाइयां लगातार मासिक गुणवत्ता अलर्ट में सामने आ रही हैं।
राज्य ड्रग्स कंट्रोलर डॉ. मनीष कपूर ने बताया कि नियमों का उल्लंघन करने वाली इकाइयों, खासकर बार-बार गलती करने वालों के खिलाफ सख्ती बढ़ा दी गई है। साल 2026 में 46 इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई की गई, जिसमें उनके उत्पादों की मंजूरी को निलंबित करना और उनके उत्पादन को पूरी तरह या आंशिक रूप से रोकना शामिल है। इसकी तुलना में, 2025 में 20 इकाइयों और 2024 में 17 इकाइयों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई की गई थी। डॉ. कपूर ने कहा कि 'ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट' के प्रावधानों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही भी शुरू की गई है। पिछले तीन वर्षों में, 96 दवा इकाइयों को अपना उत्पादन पूरी तरह या आंशिक रूप से रोकना पड़ा है। हालांकि, अधिकारियों ने इन कंपनियों के नामों का खुलासा नहीं किया।
स्वास्थ्य सचिव आशीष सिंघमार ने कहा कि 'नॉट-ऑफ-स्टैंडर्ड-क्वालिटी' (NSQ) दवाओं के अनुपात को कुल उत्पादन की मात्रा के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि देश में होने वाली कुल दवा आपूर्ति में हिमाचल की हिस्सेदारी लगभग 33 प्रतिशत है और यहां से बड़ी मात्रा में दवाओं का निर्यात भी किया जाता है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय अलर्ट में राज्य के NSQ (मानक गुणवत्ता के अनुरूप नहीं) नमूनों की हिस्सेदारी जुलाई में 239 में से 82 थी, जो अगस्त में 220 में से 64 और सितंबर में 330 में से 95 रह गई। उन्होंने आगे कहा कि यह अनुपात जुलाई के लगभग 34 प्रतिशत से घटकर सितंबर में 28.8 प्रतिशत हो गया।
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