शिमला। हिमाचल प्रदेश में किशाऊ मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। सोमवार को भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राजीव बिंदल ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर परियोजना से जुड़े तथ्यों को गलत तरीके से पेश करने का आरोप लगाया।राजीव बिंदल ने दावा किया कि लंबे समय से लंबित इस अंतर-राज्यीय परियोजना को आगे बढ़ाने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की अहम भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के प्रयासों के बाद ही छह राज्यों के बीच इस परियोजना को लेकर समझौता संभव हो सका।
छह राज्यों से जुड़ा है किशाऊ प्रोजेक्ट
किशाऊ मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट टोंस नदी पर प्रस्तावित एक बड़ी जल विद्युत और बहुउद्देशीय परियोजना है। यह परियोजना कई राज्यों से जुड़ी हुई है, जिसके कारण इसके लिए राज्यों के बीच सहमति बनाना लंबे समय से चुनौतीपूर्ण रहा है।राजीव बिंदल ने कहा कि इस परियोजना के लिए छह राज्यों के बीच समझौता हुआ है। उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार द्वारा परियोजना के जल घटक की लागत का 90 प्रतिशत हिस्सा वहन करने की सहमति के बाद यह सहमति बन पाई।
केंद्र सरकार के प्रयासों का श्रेय लेने का दावा
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि किशाऊ परियोजना को लेकर केंद्र सरकार ने लगातार प्रयास किए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के हस्तक्षेप के बाद राज्यों के बीच सहमति बनने का रास्ता साफ हुआ।बिंदल ने कहा कि यह परियोजना क्षेत्र के विकास, जल प्रबंधन और ऊर्जा उत्पादन के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
मुख्यमंत्री सुक्खू पर लगाया आरोप
राजीव बिंदल ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर आरोप लगाया कि उन्होंने किशाऊ प्रोजेक्ट से जुड़े तथ्यों को सही तरीके से प्रस्तुत नहीं किया।उन्होंने कहा कि परियोजना की प्रगति और समझौते को लेकर वास्तविक स्थिति जनता के सामने रखी जानी चाहिए। भाजपा नेता ने केंद्र सरकार की भूमिका को प्रमुख बताते हुए कहा कि इसका श्रेय किसी एक राज्य सरकार को नहीं दिया जा सकता।
परियोजना के संभावित फायदे
किशाऊ मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट को जल संसाधन प्रबंधन और ऊर्जा उत्पादन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। परियोजना से बिजली उत्पादन के साथ-साथ जल भंडारण और सिंचाई से जुड़े लाभ मिलने की संभावना जताई जाती है।ऐसी बहुउद्देशीय परियोजनाएं क्षेत्रीय विकास और जल उपलब्धता को बेहतर बनाने में भूमिका निभा सकती हैं।
राज्यों के बीच सहमति रही चुनौती
कई राज्यों से जुड़े होने के कारण किशाऊ परियोजना पर सहमति बनाना आसान नहीं रहा है। अलग-अलग राज्यों के हितों, पानी के बंटवारे और लागत से जुड़े मुद्दों पर लंबे समय तक चर्चा चलती रही।केंद्र सरकार की ओर से लागत और अन्य पहलुओं पर सहयोग की बात सामने आने के बाद समझौते की प्रक्रिया आगे बढ़ी।
भाजपा ने केंद्र की भूमिका को बताया अहम
राजीव बिंदल ने कहा कि छह राज्यों के बीच हुआ समझौता केंद्र सरकार की पहल का परिणाम है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह का धन्यवाद भी किया।उन्होंने कहा कि परियोजना से जुड़े सभी पक्षों को मिलकर इसे आगे बढ़ाना चाहिए ताकि क्षेत्र को इसका लाभ मिल सके।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी
किशाऊ प्रोजेक्ट को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई है। भाजपा जहां इसे केंद्र सरकार के प्रयासों का परिणाम बता रही है, वहीं कांग्रेस की ओर से इस मुद्दे पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं।फिलहाल परियोजना को लेकर दोनों दलों के बीच श्रेय लेने की राजनीति जारी है।
आगे की प्रक्रिया पर नजर
किशाऊ मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट को लेकर आगे की प्रक्रिया में राज्यों के बीच समन्वय और परियोजना से जुड़े तकनीकी पहलुओं पर ध्यान दिया जाएगा।राजीव बिंदल के बयान के बाद यह मुद्दा हिमाचल प्रदेश की राजनीति में फिर चर्चा का विषय बन गया है। परियोजना को लेकर आगे सरकार और विपक्ष के बीच और बयान आने की संभावना है।
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