शिमला। त्योहारों का मौसम शुरू होने से पहले हिमाचल प्रदेश में खाद्य वस्तुओं की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। राज्य के कई हिस्सों में प्याज के दाम में अचानक तेजी देखने को मिल रही है। शिमला, कांगड़ा, सोलन समेत कई जिलों में बढ़ती कीमतों का असर अब सीधे लोगों की रसोई के बजट पर पड़ने लगा है। वहीं चीनी के दाम बढ़ने की वजह से भी घरेलू खर्च बढ़ने की आशंका है।

प्याज की कीमतों में पिछले करीब 10 दिनों में कई जगह 15 रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मंडी और हमीरपुर जिले के बाजारों में प्याज के दाम लगातार ऊपर जाते दिखाई दे रहे हैं। रोजमर्रा के भोजन का अहम हिस्सा होने के कारण प्याज की कीमत में इस तरह की वृद्धि का सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा है।

मंडी में 32 से बढ़कर 50 रुपये किलो हुआ प्याज

मंडी जिले में प्याज की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का आंकड़ा सामने आया है। 13 अगस्त को प्याज करीब 32 रुपये प्रति किलो बिक रहा था। इसके बाद कीमत में लगातार वृद्धि हुई।

18 अगस्त को प्याज का भाव बढ़कर करीब 40 रुपये प्रति किलो पहुंच गया। 21 अगस्त को यह कीमत 42 रुपये, 22 अगस्त को 45 रुपये और 23 अगस्त को प्याज का भाव करीब 50 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया।

इस तरह महज कुछ दिनों के भीतर प्याज की कीमत में करीब 18 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी दर्ज की गई। लगातार बढ़ती कीमतों से उपभोक्ता परेशान हैं और उन्हें आशंका है कि आने वाले दिनों में दाम और बढ़ सकते हैं।

हमीरपुर में भी 15 रुपये तक बढ़ोतरी

हमीरपुर जिले में भी प्याज की कीमतों में तेजी देखने को मिली है। यहां करीब 10 दिन पहले प्याज 30 से 35 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रहा था। लेकिन 20 अगस्त तक कीमत बढ़कर करीब 40 से 45 रुपये प्रति किलो हो गई।

इसके बाद 22 और 23 अगस्त को बाजार में लाल प्याज की कीमत करीब 45 से 50 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई। यानी करीब 10 दिनों की अवधि में प्याज के दाम में लगभग 15 रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी हुई है।

स्थानीय उपभोक्ताओं के अनुसार, इतनी कम अवधि में कीमतों में हुई वृद्धि ने घर का बजट बिगाड़ दिया है। जिन परिवारों में रोजाना सब्जियों में प्याज का इस्तेमाल अधिक होता है, उनके लिए बढ़ी कीमत का असर और ज्यादा महसूस हो रहा है।

त्योहारों से पहले बढ़ी चिंता

आने वाले दिनों में त्योहारों के कारण खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने की संभावना है। त्योहारों के दौरान घरों में सामान्य दिनों की तुलना में अधिक पकवान तैयार किए जाते हैं। ऐसे में प्याज और चीनी जैसी आवश्यक वस्तुओं की मांग बढ़ने पर कीमतों में और तेजी की आशंका जताई जा रही है।

पहले से महंगाई का सामना कर रहे परिवारों के लिए खाद्य वस्तुओं के बढ़ते दाम अतिरिक्त आर्थिक दबाव पैदा कर रहे हैं। खासकर मध्यम और निम्न आय वर्ग के लोगों को सीमित आय में घरेलू जरूरतों को पूरा करने में कठिनाई हो रही है।

प्याज काटने के साथ खरीदना भी महंगा

प्याज की बढ़ती कीमतों पर उपभोक्ताओं के बीच चर्चा भी तेज हो गई है। आम बोलचाल में प्याज काटते समय आंखों में आंसू आने की बात कही जाती है, लेकिन अब इसकी कीमतों ने भी लोगों को परेशान कर दिया है।

उपभोक्ताओं का कहना है कि कुछ दिन पहले तक जिस प्याज को सामान्य कीमत पर खरीदा जा रहा था, वही अब काफी महंगा हो गया है। रोजाना इस्तेमाल होने वाली वस्तु होने के कारण इसे खरीदना टाला भी नहीं जा सकता।

दुकानदार भी कीमतों को लेकर परेशान

प्याज के दाम बढ़ने का असर केवल ग्राहकों पर ही नहीं बल्कि खुदरा दुकानदारों पर भी पड़ रहा है। दुकानदारों को थोक बाजार से महंगे दाम पर प्याज खरीदना पड़ रहा है। इसके बाद परिवहन और अन्य खर्च जुड़ने से खुदरा कीमत और बढ़ जाती है।

व्यापारियों के लिए भी कीमतों में लगातार बदलाव के कारण बिक्री और स्टॉक बनाए रखना चुनौती बन रहा है। यदि थोक कीमत में लगातार वृद्धि होती है तो खुदरा बाजार में भी उसका असर दिखाई देना स्वाभाविक है।

कीमत बढ़ने के पीछे कई वजहें

प्याज की कीमतों में तेजी के पीछे आपूर्ति और मांग का संतुलन महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि बाजार में आवक कम होती है और मांग बनी रहती है तो कीमतों में तेजी आ सकती है। इसके अलावा परिवहन लागत, मौसम और उत्पादन से जुड़े कारक भी बाजार भाव को प्रभावित कर सकते हैं।

हालांकि, मौजूदा तेजी के वास्तविक कारणों का स्पष्ट आकलन संबंधित विभाग और बाजार की निगरानी से ही किया जा सकेगा। उपभोक्ताओं को उम्मीद है कि प्रशासन कीमतों की स्थिति पर नजर रखेगा और अनावश्यक मुनाफाखोरी पर रोक लगाने के लिए आवश्यक कदम उठाएगा।

चीनी के दाम बढ़ने से भी दबाव

प्याज के साथ चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी की खबरों ने भी लोगों की चिंता बढ़ा दी है। त्योहारों से पहले चीनी की मांग बढ़ना स्वाभाविक है, क्योंकि घरों में मिठाइयों और अन्य पकवानों की तैयारी बढ़ जाती है।

ऐसे में चीनी के दाम बढ़ने से त्योहारों का खर्च भी बढ़ सकता है। पहले ही प्याज जैसी जरूरी वस्तु महंगी होने से परेशान लोगों के लिए चीनी की बढ़ती कीमत अतिरिक्त बोझ बन सकती है।

सरकार से राहत की उम्मीद

लगातार बढ़ती कीमतों के बीच उपभोक्ता अब सरकार और संबंधित विभाग से राहत की उम्मीद कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि आवश्यक खाद्य वस्तुओं के दाम पर नियमित निगरानी होनी चाहिए, ताकि जमाखोरी या अनावश्यक मुनाफाखोरी की स्थिति न बने।

बाजार में कीमतों की निगरानी बढ़ाने के साथ-साथ पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करना भी जरूरी माना जा रहा है। इससे त्योहारों के दौरान अचानक कीमत बढ़ने की संभावना को कम किया जा सकता है।

फिलहाल हिमाचल प्रदेश के कई इलाकों में प्याज की बढ़ती कीमतों ने आम आदमी की रसोई का बजट प्रभावित करना शुरू कर दिया है। मंडी में जहां 13 अगस्त को प्याज 32 रुपये किलो था, वहीं 23 अगस्त को यह 50 रुपये तक पहुंच गया। हमीरपुर में भी करीब 10 दिनों में कीमत 30-35 रुपये से बढ़कर 45-50 रुपये किलो हो गई है। त्योहारों से पहले कीमतों में यह तेजी उपभोक्ताओं के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।

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