Karsog hospital में नवजात शिशु देखभाल इकाई बनेगी

Update: 2026-04-04 08:14 GMT
Himachal Pradesh.हिमाचल प्रदेश: राज्य स्वास्थ्य विभाग ने Karsog Hospital में नवजात शिशु देखभाल इकाई (Neonatal Care Unit) स्थापित करने की योजना की घोषणा की है। यह कदम प्रदेश में नवजात शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने और माताओं व बच्चों की जीवन सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि नवजात शिशु देखभाल इकाई में आधुनिक उपकरण और प्रशिक्षित स्टाफ तैनात किया जाएगा। इकाई में आईसीयू (NICU), इन्क्यूबेटर, ऑक्सीजन सपोर्ट और विशेष निगरानी सुविधाएं होंगी, ताकि जटिल जन्म और कम वजन वाले शिशुओं का समय पर उपचार किया जा सके। विभाग ने कहा कि यह पहल खासतौर पर कस्बा और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए लाभकारी होगी, जहां गंभीर नवजात समस्याओं के इलाज के लिए अक्सर बड़े शहरों में जाना पड़ता था।
अधिकारियों के अनुसार, इकाई के संचालन के लिए वरिष्ठ चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ का चयन किया जा चुका है। सभी कर्मचारियों को नवजात देखभाल में प्रशिक्षित किया जाएगा और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल के लिए आवश्यक प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। इस सुविधा से न केवल शिशुओं की जीवन रक्षा होगी, बल्कि माता-पिता को भी मानसिक और चिकित्सकीय सहायता मिल सकेगी।
Karsog Hospital के प्रधान चिकित्सक ने कहा, “हमारा उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को हर स्तर पर सुदृढ़ बनाना है। नवजात देखभाल इकाई के निर्माण से स्थानीय और ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को बेहतर इलाज मिल सकेगा। यह इकाई हर बच्चे की सुरक्षा और स्वस्थ विकास के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी।”
स्वास्थ्य विभाग ने यह भी बताया कि इकाई की स्थापना के लिए सभी वित्तीय और तकनीकी संसाधनों का इंतजाम किया गया है। इसके साथ ही, स्थानीय प्रशासन और पंचायतों को भी सहयोग के लिए जोड़ा गया है, ताकि समुदाय में इस सुविधा के प्रति जागरूकता और लाभ सुनिश्चित किया जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि नवजात देखभाल इकाई का यह कदम हिमाचल प्रदेश में मातृ और शिशु स्वास्थ्य सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में नवजात मृत्यु दर को कम करने के लिए इस तरह की इकाईयों की स्थापना अत्यंत आवश्यक मानी जा रही है।
कुल मिलाकर, Karsog Hospital में नवजात शिशु देखभाल इकाई का निर्माण न केवल चिकित्सा सुविधाओं को मजबूत करेगा, बल्कि स्थानीय परिवारों के लिए भी राहत और विश्वास का स्रोत बनेगा। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि यह पहल प्रदेश में नवजात स्वास्थ्य सुधार और मातृ-शिशु कल्याण को बढ़ावा देने के लिए एक मील का पत्थर साबित होगी।
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