Himachal Pradesh.हिमाचल प्रदेश: राज्य में गर्मियों के मौसम के दौरान जंगलों में आग लगने की संभावना को देखते हुए वन विभाग ने सुरक्षा और संरक्षण के लिए ठोस योजना बनाई है। इस योजना के तहत जंगलों में फायर लाइन बनाने के साथ-साथ 450 हेक्टेयर क्षेत्र में कंट्रोल्ड बर्निंग की जाएगी।
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि फायर लाइन का निर्माण जंगल की विभिन्न श्रेणियों में किया जाएगा, जिससे आग फैलने की गति को रोका जा सके और प्रभावित क्षेत्रों को सुरक्षित रखा जा सके। फायर लाइन को नियमित रूप से साफ और बनाए रखने का काम भी वनकर्मियों द्वारा किया जाएगा।
कंट्रोल्ड बर्निंग की प्रक्रिया में जंगल के कुछ हिस्सों में नियंत्रित तरीके से आग लगाई जाएगी, ताकि घास, झाड़ियां और सूखी पत्तियाँ जलकर जंगल की मुख्य लकड़ी और पेड़ों को सुरक्षित रख सकें। अधिकारियों ने कहा कि यह प्रक्रिया पूरी तरह से प्रशिक्षित कर्मियों और पर्यावरण विशेषज्ञों की निगरानी में की जाएगी।
वन विभाग का कहना है कि इस योजना का उद्देश्य केवल जंगल की सुरक्षा करना नहीं है, बल्कि इससे वन्यजीवों के आवास को भी संरक्षित किया जा सकेगा। फायर लाइन और कंट्रोल्ड बर्निंग से जंगलों में प्राकृतिक नवीनीकरण भी होगा और जंगलों की जैव विविधता सुरक्षित रहेगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि हिमाचल प्रदेश की कठिन भौगोलिक संरचना में जंगलों में आग लगना गंभीर खतरा बन सकता है। ऐसे में फायर लाइन और नियंत्रित जलाने जैसी तकनीकें जंगल संरक्षण के लिए बेहद प्रभावी साबित होती हैं। उन्होंने बताया कि यह उपाय आग लगने की घटनाओं को समय रहते रोकने और नुकसान कम करने में मदद करेगा।
वन विभाग ने स्थानीय लोगों और पर्यटन उद्योग से भी सहयोग की अपील की है। उन्होंने कहा कि जंगलों के पास आग लगाने, कचरा फेंकने या किसी भी प्रकार की लापरवाही से बचना जरूरी है। जनता की सतर्कता और सहयोग से ही जंगल सुरक्षा में सफलता सुनिश्चित की जा सकती है।
इस योजना के तहत जंगलों में सुरक्षा गश्त बढ़ाई जाएगी और किसी भी संदिग्ध घटना की तुरंत रिपोर्टिंग की जाएगी। विभाग ने आग बुझाने के उपकरण, पानी की आपूर्ति और अन्य आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था भी पूरी कर ली है।