कुदरत का कहर जारी हिमाचल में 166 सड़कें बंद 21 अगस्त तक यलो अलर्ट
हिमाचल में आपदा से भारी तबाही 205 मौतें करोड़ों का नुकसान
शिमला: हिमाचल प्रदेश में मानसून की भारी बारिश ने तबाही मचा रखी है। लगातार हो रही बारिश, भूस्खलन और बादल फटने जैसी घटनाओं से पहाड़ी राज्य में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। अब तक बारिश से जुड़े हादसों में 205 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि राज्य की 166 सड़कें बंद पड़ी हैं। प्राकृतिक आपदा से प्रदेश को करीब 1033 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया गया है।
मौसम विभाग ने प्रदेश में 21 अगस्त तक बारिश को लेकर यलो अलर्ट जारी किया है। विभाग ने लोगों और पर्यटकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। खासकर पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन, अचानक बाढ़ और पत्थर गिरने की घटनाओं को देखते हुए प्रशासन ने सावधानी बरतने की अपील की है।
बारिश के कारण प्रदेश के कई जिलों में सड़क संपर्क प्रभावित हुआ है। मंडी, कुल्लू, शिमला, सिरमौर और अन्य क्षेत्रों में कई मार्ग बंद हैं। सड़कें बंद होने से स्थानीय लोगों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन और लोक निर्माण विभाग की टीमें सड़कों को बहाल करने में जुटी हुई हैं। आपदा का सबसे ज्यादा असर पहाड़ी क्षेत्रों में देखने को मिला है। कई जगहों पर भूस्खलन के कारण मकानों को नुकसान पहुंचा है, जबकि बिजली और पानी की आपूर्ति भी प्रभावित हुई है। राज्य में राहत और बचाव कार्य लगातार जारी हैं।
अधिकारियों के अनुसार, मानसून के दौरान हुई तबाही में सरकारी संपत्तियों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। सड़कों, पुलों, बिजली ढांचे और जल आपूर्ति योजनाओं पर इसका सीधा असर पड़ा है। प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन की टीमें नुकसान का आकलन कर रही हैं। राज्य सरकार ने सभी जिलों के प्रशासन को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं। आपदा संभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई गई है और लोगों को नदी-नालों तथा भूस्खलन वाले क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी जा रही है।
हिमाचल में लगातार बिगड़ते मौसम ने एक बार फिर पहाड़ी राज्यों की संवेदनशीलता को उजागर किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बारिश के दौरान पहाड़ी इलाकों में यात्रा करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतना जरूरी है।