Bilaspur जिला परिषद में बड़ा उलटफेर, जांगला वार्ड में निर्दलीय की जीत

Update: 2026-06-01 11:19 GMT

Himachal Pradesh हिमाचल प्रदेश : हिमाचल प्रदेश में जिला परिषद चुनावों के लगभग सभी नतीजे सामने आ चुके हैं और कई सीटों पर रोचक राजनीतिक तस्वीर उभरकर आई है। बिलासपुर जिले के जांगला वार्ड में इस बार बड़ा उलटफेर देखने को मिला, जहां एक निर्दलीय और भाजपा से असंतुष्ट प्रत्याशी ने भारी अंतर से जीत दर्ज की है।

जानकारी के अनुसार, जांगला वार्ड में हुए मुकाबले में निर्दलीय प्रत्याशी की जीत ने दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों को चौंका दिया है। जीत का अंतर इतना बड़ा रहा कि इसे स्थानीय राजनीति में एक अहम संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

चुनाव से पहले देवांश चंदेल ने हिमाचल प्रदेश की राजनीति में भाजपा से समर्थन की उम्मीद जताई थी। वे भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के प्रदेश स्तर के पदाधिकारी भी रहे हैं। उन्होंने लगातार पार्टी से संपर्क कर समर्थन की मांग की थी।

हालांकि, पार्टी नेतृत्व ने स्थानीय संगठन से चर्चा के बाद देवांश चंदेल को टिकट नहीं दिया। इसके बजाय पार्टी ने अनूप महाजन को अपना अधिकृत उम्मीदवार घोषित किया। इस फैसले के बाद राजनीतिक समीकरण बदल गए और देवांश चंदेल ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतरने का निर्णय लिया।

चुनाव परिणामों ने यह साफ कर दिया कि जमीनी स्तर पर स्थानीय समीकरणों और व्यक्तिगत प्रभाव ने इस बार बड़ा रोल निभाया। निर्दलीय प्रत्याशी की इस जीत को क्षेत्र में पार्टी लाइन से अलग जनसमर्थन के रूप में देखा जा रहा है।

हिमाचल प्रदेश के जिला परिषद चुनाव में कई जगहों पर निर्दलीय उम्मीदवारों का प्रदर्शन भी चर्चा में है, लेकिन जांगला वार्ड की जीत सबसे ज्यादा ध्यान आकर्षित कर रही है।

स्थानीय राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह परिणाम पार्टी संगठन के भीतर असंतोष और टिकट वितरण को लेकर जनता की प्रतिक्रिया को दर्शाता है। वहीं, इस जीत ने आने वाले समय में स्थानीय राजनीति की दिशा को भी प्रभावित करने के संकेत दिए हैं।

कुल मिलाकर, जांगला वार्ड की यह जीत न केवल एक उम्मीदवार की सफलता है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि मतदाता इस बार पारंपरिक राजनीतिक समीकरणों से आगे बढ़कर फैसले ले रहे हैं।

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