शिमला: हिमाचल प्रदेश में पिछली भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान हुए कथित भर्ती घोटालों और पेपर लीक मामलों को लेकर सुक्खू सरकार ने बड़ा कदम उठाने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने ऐलान किया है कि प्रदेश सरकार इन मामलों पर श्वेत पत्र (व्हाइट पेपर) जारी करेगी। इसके लिए एक विशेष समिति का गठन किया जाएगा, जो पूरे मामले की जांच कर तथ्यों को सामने लाएगी।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट साझा करते हुए कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार के कार्यकाल में हुए पेपर लीक और भर्ती अनियमितताओं के कारण बड़ी संख्या में मेहनती युवाओं को नुकसान उठाना पड़ा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी का सबसे ज्यादा असर उन युवाओं पर पड़ा, जो वर्षों तक मेहनत करके सरकारी नौकरी पाने का सपना देखते हैं। उन्होंने कहा कि 16 से 18 वर्ष की आयु के कई युवाओं ने पेपर लीक जैसी घटनाओं के कारण मानसिक परेशानी झेली और उनका भविष्य प्रभावित हुआ। जब इन अभ्यर्थियों ने न्याय की मांग को लेकर संघर्ष किया, तब वर्तमान सरकार उनके साथ खड़ी रही।
सुक्खू सरकार का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में किसी भी तरह की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार अब पिछली सरकार के दौरान सामने आए मामलों की विस्तृत समीक्षा कराएगी और दोषियों की जिम्मेदारी तय करने की दिशा में आगे बढ़ेगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि भर्ती घोटालों और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच के लिए जल्द ही एक विशेष समिति गठित की जाएगी। इस संबंध में प्रस्ताव आगामी कैबिनेट बैठक में लाया जाएगा। समिति को सभी संबंधित दस्तावेजों, जांच रिपोर्टों और तथ्यों का अध्ययन करने की जिम्मेदारी दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि समिति जांच के बाद दोषियों के खिलाफ विस्तृत चार्जशीट तैयार करेगी। इस चार्जशीट को प्रदेश की जनता के सामने रखा जाएगा, ताकि लोगों को यह जानकारी मिल सके कि भर्ती प्रक्रिया में कहां-कहां खामियां रहीं और इसके लिए कौन जिम्मेदार हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी राजनीतिक बदले की भावना से काम करना नहीं है, बल्कि व्यवस्था में सुधार करना और युवाओं के विश्वास को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि सरकारी नौकरियों में चयन प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि मेहनत करने वाले युवाओं को उनका अधिकार मिल सके।
हिमाचल प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों में भर्ती परीक्षाओं से जुड़े विवाद सामने आते रहे हैं। पेपर लीक के मामलों ने युवाओं के बीच नाराजगी पैदा की थी और कई बार परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठे थे। अब सरकार इन मामलों की जांच के लिए श्वेत पत्र लाने की तैयारी कर रही है।
राजनीतिक रूप से भी यह कदम काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विपक्षी भाजपा पर निशाना साधते हुए कांग्रेस सरकार ने भर्ती मामलों को लेकर जवाबदेही तय करने की बात कही है। वहीं, सरकार के इस फैसले से प्रदेश में भर्ती व्यवस्था को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
सुक्खू सरकार का दावा है कि आने वाले समय में भर्ती प्रक्रिया को और मजबूत बनाया जाएगा, ताकि पेपर लीक जैसी घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके। सरकार का लक्ष्य है कि युवाओं को निष्पक्ष माहौल मिले और सरकारी नौकरी पाने का उनका सपना बिना किसी भ्रष्टाचार या अनियमितता के पूरा हो सके।