तियारा गांव में होगा मेजर मनकोटिया का अंतिम संस्कार
पैतृक गांव में मेजर मनकोटिया को अंतिम विदाई
धर्मशाला: हिमाचल सरकार में दो बार मंत्री एवं शाहपुर से पांच बार के विधायक मेजर विजय सिंह मनकोटिया का आज दोपहर 12 बजे उनके पैतृक गांव तियारा में अंतिम संस्कार होगा। मेजर मनकोटिया (87) का बीते मंगलवार को तियारा में हार्ट अटैक से निधन हो गया था।
पूर्व मंत्री के बेटा और बेटी दोनों कुछ देर में विदेश से कांगड़ा के गगल एयरपोर्ट पहुंचेंगे। उनके पहुंचने के बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके बाद मनकोटिया की पार्थिव देह कुछ समय के लिए अंतिम दर्शन के लिए रखी जाएगी।
मेजर मनकोटिया के भाई अभय सिंह ने बताया कि सुबह 11:30 बजे सेना की टुकड़ी घर पर उन्हें सैन्य सम्मान के साथ श्रद्धांजलि देगी। इसके बाद आर्मी की मौजूदगी में शव यात्रा तियारा श्मशानघाट के लिए रवाना होगी। मनकोटिया के निधन के बाद उनके घर पर बीते कल से ही बड़ी संख्या में लोग जुटने शुरू हो गए थे।
तियारा पंचायत के पूर्व प्रधान संदीप मनकोटिया ने बताया कि शव यात्रा में प्रदेश के कोने-कोने से पूर्व सैनिक और कांगड़ा के लोग शामिल होंगे। तियारा बाजार भी आज बंद रहेगा। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा समेत कांग्रेस-भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने उनके निधन पर शोक जताया है।
चार दशक से ज्यादा प्रदेश की राजनीति में सक्रिय रहे मेजर विजय सिंह मनकोटिया ने हिमाचल की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई। वर्ष 1982 में पहली बार उन्होंने शाहपुर से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव जीतकर राजनीतिक सफर शुरू किया। 1985 में कांग्रेस, 1990 में जनता दल, 1993 में कांग्रेस और 2003 में फिर शाहपुर से विधानसभा पहुंचे। इस तरह वह पांच बार विधायक रहे।
अपने राजनीतिक जीवन में उन्होंने कांग्रेस के अलावा जनता दल, बसपा और निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर भी चुनाव लड़ा। वह 1995 और 2003 में हिमाचल सरकार में मंत्री रहे। पर्यटन, नागरिक उड्डयन और कानून जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी भी उनके पास रही। एक समय वह हिमाचल पर्यटन विकास निगम के उपाध्यक्ष भी रहे।
राजनीति में आने से पहले मेजर मनकोटिया भारतीय सेना में अधिकारी रहे। सेना से सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा। सैन्य पृष्ठभूमि के कारण उनका सार्वजनिक जीवन भी स्पष्टवादिता और बेबाक अंदाज के लिए जाना गया। वह पूर्व सैनिकों से जुड़े संगठनों में भी सक्रिय रहे।