बागवानी को मिलेगा नया बढ़ावा, 15 करोड़ से बनेगा इंडो न्यूजीलैंड सेंटर
हिमाचल के बागवानों को बड़ी सौगात
शिमला: हिमाचल प्रदेश के बागवानों के लिए अच्छी खबर है। राज्य में सेब, कीवी और नाशपाती की खेती को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए करीब 15 करोड़ रुपये की लागत से इंडो-न्यूजीलैंड सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने की योजना है। इस परियोजना का मकसद बागवानों को बेहतर पौध सामग्री, आधुनिक खेती तकनीक और फसल कटाई के बाद बेहतर प्रबंधन की सुविधा उपलब्ध कराना है। बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने न्यूजीलैंड के छह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक में इस प्रस्तावित परियोजना पर चर्चा की। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व भारत में न्यूजीलैंड के उच्चायुक्त पैट्रिक राटा ने किया। बैठक में हिमाचल के बागवानी क्षेत्र को आधुनिक बनाने और किसानों की आय बढ़ाने से जुड़े कई विषयों पर चर्चा हुई।
प्रस्तावित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस खास तौर पर सेब, कीवी और नाशपाती की खेती पर केंद्रित होगा। इसके तहत गुणवत्तापूर्ण, रोग प्रतिरोधी और बेहतर किस्मों की पौध तैयार करने के लिए आधुनिक नर्सरी विकसित की जाएंगी। इससे बागवानों को स्वस्थ और बेहतर उत्पादन देने वाली पौध उपलब्ध हो सकेगी। परियोजना में न्यूजीलैंड की तकनीकी विशेषज्ञता का इस्तेमाल किया जाएगा। सरकार का मानना है कि न्यूजीलैंड की आधुनिक बागवानी तकनीकों से हिमाचल के किसानों को उत्पादन बढ़ाने और फलों की गुणवत्ता सुधारने में मदद मिलेगी। इसके लिए किसानों को प्रशिक्षण और एक्सपोजर विजिट भी कराई जाएंगी।
सेंटर में केवल पौध तैयार करने पर ही काम नहीं होगा, बल्कि पोस्ट-हार्वेस्ट मैनेजमेंट की सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। इसमें फलों की ग्रेडिंग, स्टोरेज, पैकिंग और बाजार तक पहुंच से जुड़ी आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है। हिमाचल की अर्थव्यवस्था में बागवानी का बड़ा योगदान है। हजारों परिवार प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सेब और अन्य फल उत्पादन पर निर्भर हैं। राज्य के आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार सेब हिमाचल की सबसे महत्वपूर्ण फल फसल है और राज्य के कुल फल उत्पादन में इसकी बड़ी हिस्सेदारी है।
सरकार का कहना है कि परियोजना के जरिए बागवानों के कौशल को बेहतर किया जाएगा। उन्हें नई किस्मों, वैज्ञानिक बागवानी, रोग प्रबंधन और आधुनिक सिंचाई तकनीकों की जानकारी दी जाएगी। इससे उत्पादन लागत को नियंत्रित करने और गुणवत्ता सुधारने में मदद मिल सकती है। न्यूजीलैंड का प्रतिनिधिमंडल प्रस्तावित परियोजना स्थलों का दौरा भी करेगा। इसके दौरान भौगोलिक परिस्थितियों और बागवानी की संभावनाओं का आकलन किया जाएगा। प्रतिनिधिमंडल सिरमौर जिले के राजगढ़ क्षेत्र का भी दौरा करेगा।
भारत और न्यूजीलैंड के बीच बागवानी सहयोग पहले से आगे बढ़ रहा है। फरवरी 2026 में दोनों देशों ने बागवानी सहयोग पर संयुक्त कार्य समूह की पहली बैठक की थी, जिसमें कीवी, सेब और नाशपाती जैसी फसलों के विकास पर विशेष जोर दिया गया था। हिमाचल सरकार को उम्मीद है कि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनने के बाद राज्य के बागवानों को बेहतर तकनीक और गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होगी। इससे उन्हें दूसरे राज्यों या विदेशों से पौध सामग्री पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिल सकती है।
परियोजना का सबसे बड़ा फायदा उन बागवानों को हो सकता है जो पुरानी सेब किस्मों के स्थान पर नई और ज्यादा उत्पादक किस्मों को अपनाना चाहते हैं। साथ ही कीवी और नाशपाती जैसी फसलों का क्षेत्र बढ़ाने में भी यह सेंटर अहम भूमिका निभा सकता है। कुल मिलाकर 15 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित इंडो-न्यूजीलैंड सेंटर ऑफ एक्सीलेंस हिमाचल की बागवानी को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। सरकार का लक्ष्य बेहतर उत्पादन, उच्च गुणवत्ता और बाजार की मांग के मुताबिक फल तैयार करके बागवानों की आय बढ़ाना है।