Himachal : पंचायती राज संस्थाओं में 50 करोड़ से अधिक की वसूली लंबित

Update: 2026-06-13 08:43 GMT

Himachal Pradesh हिमाचल प्रदेश : शुक्रवार शाम शहर के रवींद्र भवन में एक भव्य सांस्कृतिक आयोजन के दौरान 108 से अधिक भरतनाट्यम कलाकारों ने ‘वंदे मातरम’ पर सामूहिक प्रस्तुति दी, जिसे दर्शकों ने खड़े होकर तालियों की गड़गड़ाहट के साथ सराहा। इस प्रस्तुति में तालमेल, अनुशासन, सांस्कृतिक एकता और राष्ट्रीय गौरव की अद्भुत झलक देखने को मिली।

यह कार्यक्रम ‘कलांजलि’ संस्था के 27वें कलांजलि कलोत्सव का हिस्सा था। कलांजलि भारतीय शास्त्रीय नृत्य और पारंपरिक कलाओं को बढ़ावा देने के लिए कार्यरत एक प्रतिष्ठित संस्था है, जो लंबे समय से युवा कलाकारों को मंच प्रदान कर रही है।

कार्यक्रम के दौरान प्रस्तुत ‘वंदे मातरम’ नृत्य ने पूरे सभागार को देशभक्ति के रंग में रंग दिया। बड़ी संख्या में कलाकारों की एक साथ लयबद्ध प्रस्तुति ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया और माहौल को अत्यंत भावनात्मक बना दिया।

इस शाम का एक और प्रमुख आकर्षण भरतनाट्यम आधारित प्रस्तुति ‘शिवमयम’ रही, जिसने दर्शकों का विशेष ध्यान खींचा। इस प्रस्तुति में कलाकारों ने भगवान शिव के विभिन्न स्वरूपों को नृत्य के माध्यम से प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।

नृत्य में भगवान शिव को नटराज के रूप में ब्रह्मांडीय नर्तक के रूप में दर्शाया गया, साथ ही उनके सृजन, संरक्षण, परिवर्तन और पारलौकिक शक्ति के रूपों को भी जीवंत किया गया। कलाकारों की भाव-भंगिमाओं और ताल-लय ने प्रस्तुति को और अधिक प्रभावशाली बना दिया।

दर्शकों ने दोनों प्रस्तुतियों को अत्यंत सराहा और कलाकारों की मेहनत तथा समर्पण की प्रशंसा की। पूरा सभागार तालियों की गूंज से देर तक गूंजता रहा।

आयोजकों के अनुसार, इस तरह के कार्यक्रमों का उद्देश्य युवा पीढ़ी को भारतीय शास्त्रीय नृत्य और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना है। कार्यक्रम ने न केवल कला प्रेमियों को आकर्षित किया, बल्कि सांस्कृतिक एकता का संदेश भी दिया।हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज विभाग ने स्थानीय निकायों में सामने आई वित्तीय अनियमितताओं को लेकर बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। स्थानीय निकाय लेखा परीक्षा समिति की बैठक में उजागर हुए मामलों के बाद सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि गड़बड़ी करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों से पूरी राशि की वसूली दंडात्मक ब्याज सहित की जाएगी।

विधानसभा समिति की समीक्षा में यह तथ्य सामने आया है कि 31 मार्च 2025 तक पंचायती राज संस्थाओं में कुल 50.68 करोड़ रुपये की राशि वसूली योग्य पाई गई थी। हालांकि, अब तक इस राशि में से केवल 2.09 करोड़ रुपये की ही वसूली या समायोजन किया जा सका है।

इसके विपरीत, 48.58 करोड़ रुपये से अधिक की राशि अभी भी लंबित है, जिससे विभागीय कार्यप्रणाली और वित्तीय अनुशासन पर गंभीर सवाल उठे हैं। सरकार ने इस स्थिति को चिंताजनक बताते हुए संबंधित अधिकारियों को वसूली प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।

पंचायती राज विभाग ने कहा है कि जिन मामलों में वित्तीय अनियमितताएं या गड़बड़ी सामने आई हैं, उनमें जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों से न केवल मूल राशि वसूली जाएगी, बल्कि उस पर दंडात्मक ब्याज भी लगाया जाएगा। इससे भविष्य में ऐसी लापरवाहियों पर अंकुश लगाने की उम्मीद जताई जा रही है।

अधिकारियों के अनुसार, कई मामलों में फंड के उपयोग और लेखा-जोखा में गंभीर खामियां पाई गई हैं, जिसके चलते यह बड़ी राशि अटकी हुई है। विभाग अब सभी लंबित मामलों की विस्तृत समीक्षा कर रहा है और दोषियों की पहचान की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि पंचायती राज संस्थाओं में वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है। इसके लिए निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा।

इस कार्रवाई को राज्य में स्थानीय निकायों के वित्तीय प्रबंधन को सुधारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विभाग का कहना है कि आने वाले समय में वसूली की प्रक्रिया में तेजी लाई जाएगी और लंबित मामलों का निपटारा प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा।

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