Himachal हिमाचल सरकार ने राजस्व बढ़ाने और अवैध खनन पर रोक लगाने के उद्देश्य से एक अलग 'खान निदेशालय' (Directorate of Mines) बनाया है। पिछले साल अवैध खनन के 10,645 मामले दर्ज किए गए थे। 12 अक्टूबर को हुई कैबिनेट की बैठक में, उद्योग विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत 'खान निदेशालय' बनाने को मंजूरी दी गई। अब तक, उद्योग विभाग का खनन विंग इन गतिविधियों को नियंत्रित कर रहा था, और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कई मौकों पर एक पूर्ण निदेशालय बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया था।
कैबिनेट की मंजूरी के बाद, 13 अक्टूबर को इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी गई। एक आईएएस अधिकारी 'खान निदेशक' (Director of Mines) के पद पर तैनात होंगे और उद्योग विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में विभाग के प्रमुख के रूप में काम करेंगे। मुख्य सचिव कमलेश कुमार पंत द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, संयुक्त निदेशक और सहायक नियंत्रक (वित्त) के पदों के साथ-साथ छह अन्य निचले पदों को भी उद्योग विभाग से हटाकर नए बने 'खान निदेशालय' में स्थानांतरित कर दिया गया है।
यह भी स्पष्ट किया गया है कि संबंधित कानूनी नियमों और अधिसूचनाओं में जरूरी संशोधन किए जाएंगे, ताकि 'खान निदेशालय' को अपनी जिम्मेदारियां निभाने के लिए आवश्यक शक्तियां और कार्य सौंपे जा सकें। ऊना, कांगड़ा, सिरमौर और सोलन जैसे सीमावर्ती जिलों में अवैध खनन की समस्या अधिक गंभीर है, क्योंकि यहां से अवैध रूप से निकाली गई रेत और बजरी पंजाब, हरियाणा और अन्य राज्यों में बेची जाती है। इससे हिमाचल प्रदेश को राजस्व का नुकसान होता है, क्योंकि इस पर कोई रॉयल्टी नहीं मिलती। पिछले साल अवैध खनन के सबसे अधिक 1,169 मामले सिरमौर में दर्ज किए गए, इसके बाद मंडी (1,131), सोलन (1,051), नूरपुर (893), ऊना (829) और कांगड़ा (727) का स्थान रहा।
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