Himachal Pradesh.हिमाचल प्रदेश: मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आज कहा कि कांग्रेस ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ विधेयक का विरोध करती है और उन्होंने इस मुद्दे पर विचार जानने के लिए राज्य के दौरे पर आई संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के समक्ष कुछ सुझाव रखे हैं। ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ के प्रस्ताव से संबंधित संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2024 पर संयुक्त संसदीय समिति ने आज यहां मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के साथ बैठक की। पीपी चौधरी की अध्यक्षता वाली जेपीसी ने आज यहां मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री के साथ प्रस्तावित ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ ढांचे पर विस्तृत विचार-विमर्श किया। मुख्यमंत्री ने जेपीसी के समक्ष कांग्रेस के साथ-साथ हिमाचल सरकार का दृष्टिकोण भी प्रस्तुत किया। हमीरपुर निर्वाचन क्षेत्र से सांसद अनुराग ठाकुर भी समिति के सदस्य के रूप में बैठक में शामिल हुए। उन्होंने कहा, "हमने लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए कुछ सुझाव दिए हैं, जिन्हें शामिल किया जाना चाहिए। हमें मसौदा विधेयक के बारे में बताया गया और हमने पाया कि विधेयक का दायरा बढ़ाया गया है।"
उन्होंने कहा, "हमने सुझाव दिया है कि उपचुनाव एक साल के भीतर होने चाहिए, न कि छह महीने के भीतर, जैसा कि वर्तमान में अनिवार्य है।" सुक्खू ने कहा कि हिमाचल में विधानसभा चुनाव 2027 में होने हैं और अगर संशोधन 2029 से लागू होता है तो अगले विधानसभा चुनाव में सत्ता में आने वाली सरकार का कार्यकाल क्या होगा। उन्होंने कहा, "हमने कुछ मुद्दों पर स्पष्टीकरण मांगा है, जैसे कि अगर किसी सरकार का कार्यकाल पूरा नहीं होता है, सरकार गिर जाती है या विधायक इस्तीफा दे देते हैं तो क्या होगा।" विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने भी जेपीसी से मुलाकात की और प्रस्तावित विधेयक पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा, "'एक राष्ट्र-एक चुनाव' विधेयक को लागू करने से विधानसभाओं का कार्यकाल कम हो जाएगा, जो निर्धारित मानदंडों के खिलाफ होगा।" विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि यदि ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ विधेयक को लागू करना है तो इसके लिए कई प्रशासनिक कदम उठाने होंगे। हालांकि उन्होंने माना कि यह अवधारणा इस दृष्टि से अच्छी है कि इससे समय-समय पर चुनाव कराने पर होने वाले भारी-भरकम खर्च पर अंकुश लगेगा। ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ विधेयक का समर्थन करते हुए विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर ने कहा कि एक साथ चुनाव कराने से बार-बार चुनाव कराने में बर्बाद होने वाला समय और महीनों तक सरकार का कामकाज ठप रहने की समस्या खत्म होगी। उन्होंने कहा कि भारत में 1951 से 1967 तक और हिमाचल में 1977 तक लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ होते रहे। ठाकुर ने कहा, ‘‘एक राष्ट्र-एक चुनाव समय की मांग है और हालांकि लंबे समय में कुछ विधानसभाओं का कार्यकाल कम हो सकता है, लेकिन यह देश के हित में होगा।’’
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