शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के पांचवें दिन बुधवार को रोजगार और सरकारी विभागों में खाली पड़े पदों का मुद्दा सदन में प्रमुखता से उठने की संभावना है। इस मुद्दे पर सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी भाजपा के बीच तीखी बहस और हंगामे के आसार हैं। भाजपा के पांच विधायक सरकार को कांग्रेस के चुनावी वादे की याद दिलाते हुए सरकारी विभागों में रिक्त पदों और हर साल एक लाख नौकरियां देने के वादे पर सवाल खड़े करेंगे।

भाजपा की ओर से सुधीर शर्मा, जीतराम कटवाल, रणधीर शर्मा, हंसराज और राकेश जम्वाल इस मुद्दे को सदन में उठाएंगे। विधायक सरकारी विभागों में लंबे समय से खाली चल रहे पदों की स्थिति, भर्ती प्रक्रिया और सरकार की ओर से अब तक किए गए प्रयासों को लेकर जवाब मांग सकते हैं। इसके साथ ही कांग्रेस के उस वादे को भी चर्चा के केंद्र में रखा जाएगा, जिसमें हर साल एक लाख रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की बात कही गई थी।

रोजगार का मुद्दा हिमाचल की राजनीति में पहले से ही संवेदनशील रहा है। प्रदेश में बड़ी संख्या में युवा सरकारी नौकरियों की तैयारी करते हैं। ऐसे में विभागों में खाली पदों पर भर्ती और नई नौकरियों के अवसर सरकार के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक विषय हैं। विपक्ष लगातार यह सवाल उठाता रहा है कि चुनाव के दौरान किए गए रोजगार संबंधी वादों को जमीन पर किस गति से लागू किया जा रहा है।

मंगलवार को भी विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान रोजगार और रिक्त पदों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई थी। दोनों पक्षों के बीच सवाल-जवाब के दौरान माहौल गर्म रहा। बुधवार को इस मुद्दे पर विशेष रूप से चर्चा होने की संभावना के चलते सदन में राजनीतिक तापमान और बढ़ सकता है।

भाजपा विधायक सरकार से यह जानने का प्रयास कर सकते हैं कि विभिन्न सरकारी विभागों में कुल कितने पद खाली हैं और उनमें से कितने पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसके अलावा भर्ती परीक्षाओं, नियुक्तियों और लंबित प्रक्रियाओं को लेकर भी सवाल उठ सकते हैं। विपक्ष सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग कर सकता है कि उसके रोजगार संबंधी लक्ष्यों को पूरा करने के लिए क्या रोडमैप तैयार किया गया है।

सरकार की ओर से मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू और संबंधित मंत्री विपक्ष के सवालों का जवाब दे सकते हैं। सरकार की ओर से यह बताया जा सकता है कि विभागों में खाली पदों को भरने की प्रक्रिया विभिन्न स्तरों पर जारी है और युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं।

रोजगार के साथ-साथ सरकारी विभागों में रिक्त पदों का मुद्दा प्रशासनिक कामकाज से भी जुड़ा है। लंबे समय तक पद खाली रहने से कई विभागों में कर्मचारियों पर अतिरिक्त काम का दबाव पड़ सकता है। इससे सरकारी सेवाओं की गति प्रभावित होने की शिकायतें भी सामने आती हैं। ऐसे में रिक्त पदों को भरना केवल रोजगार देने का विषय नहीं, बल्कि सरकारी व्यवस्था को मजबूत करने से भी जुड़ा हुआ है।

स्वास्थ्य चर्चा का जवाब देंगे मुख्यमंत्री

रोजगार के मुद्दे से पहले मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू स्वास्थ्य क्षेत्र पर हुई चर्चा का जवाब देंगे। विधानसभा में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर हुई चर्चा के दौरान सदस्यों ने प्रदेश के अस्पतालों, चिकित्सकों, पैरामेडिकल स्टाफ और स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़े विभिन्न मुद्दे उठाए थे। मुख्यमंत्री अपने जवाब में सरकार की स्वास्थ्य नीति और क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की जानकारी दे सकते हैं।

हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। दुर्गम क्षेत्रों में अस्पतालों और विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता, ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति तथा मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने को लेकर सरकार पर लगातार दबाव रहता है। मुख्यमंत्री के जवाब के दौरान इन विषयों पर सरकार की ओर से स्थिति स्पष्ट किए जाने की संभावना है।

मुफ्त बिजली का मुद्दा भी उठेगा

सदन में कांग्रेस विधायक केवल सिंह पठानिया निश्शुल्क बिजली का मामला भी उठाएंगे। बिजली से जुड़ा यह मुद्दा घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ राज्य की आर्थिक स्थिति से भी जुड़ा है। विधानसभा में इस विषय पर चर्चा के दौरान बिजली सब्सिडी, उपभोक्ताओं को मिलने वाली राहत और राज्य पर पड़ने वाले वित्तीय प्रभाव को लेकर सवाल उठ सकते हैं।

हिमाचल प्रदेश में बिजली क्षेत्र लंबे समय से राज्य की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। वहीं घरेलू उपभोक्ताओं को बिजली पर राहत देने की योजनाएं राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण रही हैं। ऐसे में सदन में निश्शुल्क बिजली के मुद्दे पर चर्चा के दौरान सरकार की नीति और भविष्य की योजना पर सदस्यों की नजर रहेगी।

रोजगार पर विपक्ष का दबाव

बुधवार की कार्यवाही में सबसे अधिक नजर रोजगार के मुद्दे पर रहने की संभावना है। भाजपा विधायक सरकार को चुनावी वादों के आधार पर घेरने की तैयारी में हैं। हर साल एक लाख नौकरियां देने के वादे को लेकर विपक्ष सरकार से आंकड़ों के साथ जवाब मांग सकता है।

विपक्ष यह भी सवाल उठा सकता है कि सरकार बनने के बाद अब तक कितने युवाओं को नियमित सरकारी रोजगार मिला और कितने पदों पर भर्ती प्रक्रिया पूरी हुई। विभिन्न विभागों में खाली पदों की संख्या और भर्ती की गति भी चर्चा का हिस्सा बन सकती है।

वहीं कांग्रेस सरकार के लिए यह मौका अपनी उपलब्धियां गिनाने और रोजगार के क्षेत्र में उठाए गए कदमों को सामने रखने का होगा। सरकार यह बताने की कोशिश कर सकती है कि भर्ती प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है और युवाओं के लिए सरकारी तथा गैर-सरकारी क्षेत्र में रोजगार के अवसर पैदा करने पर जोर दिया जा रहा है।

मंगलवार की तीखी बहस के बाद बुधवार को यह मुद्दा और अधिक राजनीतिक रंग ले सकता है। यदि विपक्ष सरकार के जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ तो सदन में हंगामा बढ़ने की संभावना है। दूसरी ओर, सत्ता पक्ष भी विपक्ष के आरोपों का मजबूती से जवाब देने की तैयारी में रहेगा।

मानसून सत्र के पांचवें दिन इसलिए विधानसभा की कार्यवाही काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। रोजगार, रिक्त पद, स्वास्थ्य सेवाएं और निश्शुल्क बिजली जैसे मुद्दे सीधे आम लोगों से जुड़े हैं। इनमें से रोजगार और खाली पदों पर चर्चा का असर राजनीतिक रूप से भी व्यापक हो सकता है।

अब देखना होगा कि सरकार विधानसभा में रिक्त पदों और रोजगार के वादे पर क्या आंकड़े पेश करती है और विपक्ष उन जवाबों पर किस तरह प्रतिक्रिया देता है। मंगलवार की नोकझोंक के बाद बुधवार को सदन में रोजगार का मुद्दा सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच एक बार फिर बड़ा राजनीतिक टकराव पैदा कर सकता है।

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