हिमाचल प्रदेश में इस साल यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम, 2012 के तहत दर्ज मामलों में वृद्धि देखी गई है, जिससे नाबालिगों की सुरक्षा पर चिंता बढ़ गई है। पुलिस के अनुसार, राज्य में इस साल अब तक नाबालिगों से बलात्कार के 156 मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि 2025 की समान अवधि में यह संख्या 25 थी। 12 जिलों में से, शिमला और सिरमौर में सबसे अधिक संख्या दर्ज की गई है, प्रत्येक में POCSO अधिनियम के तहत 24 मामले दर्ज किए गए हैं, जो उन्हें सबसे अधिक असुरक्षित बनाता है। पिछले साल, दोनों जिलों में क्रमशः चार और एक ऐसे मामले दर्ज किए गए थे।
मंडी में भी बड़े पैमाने पर वृद्धि देखी गई है, जहां पिछले साल की समान अवधि में तीन के मुकाबले अब तक 22 मामले दर्ज किए गए हैं। चंबा में 19, कांगड़ा में 16, कुल्लू में 11, सोलन में नौ, ऊना में सात, किन्नौर और बद्दी में छह-छह, हमीरपुर में पांच, बिलासपुर में चार, देहरा में दो और नूरपुर में एक मामला आया है। लाहौल और स्पीति एकमात्र ऐसा जिला है जहां इस साल ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है।
2025 में चंबा में दो, कांगड़ा में एक, किन्नौर में तीन, लाहौल और स्पीति में एक, देहरा में चार और नूरपुर में पांच मामले दर्ज किए गए थे। बिलासपुर, ऊना, सोलन, बद्दी, कुल्लू और हमीरपुर में ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि ऐसे मामलों को संवेदनशीलता और सख्ती से निपटाया गया और दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की गई। उन्होंने कहा कि छात्रों को ऐसे अपराधों और उनसे निपटने वाले कानूनों के बारे में जागरूक करने के लिए शैक्षणिक संस्थानों और ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।
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