धर्मशाला: तिब्बत-नेपाल सीमा पर आई विनाशकारी बाढ़ से हुए जान-माल के नुकसान को लेकर निर्वासित तिब्बती सरकार ने चीन को कटघरे में खड़ा किया है। धर्मशाला से तिब्बत सरकार के कशाग (मंत्रिमंडल) द्वारा जारी प्रेस बयान में नेपाल में इस जलप्रलय से हुए जान माल के नुकसान के लिए चीन की विनाशकारी नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है। तिब्बत में विकास के नाम पर जिस तरह से वहां के पहाड़ों और मैदानों को छलनी किया जा रहा है उससे पर्यावरण परिवर्तन के चलते तापमान में काफी बदलाव आया है।

कशाग के मुताबिक पिछले पांच दशकों से ज़्यादा समय से परम पावन दलाई लामा ने आम तौर पर वैश्विक पर्यावरण और खास तौर पर तिब्बत के प्राकृतिक पर्यावरण की सुरक्षा की ज़रूरत पर बार-बार मार्गदर्शन दिया है। यही नही तिब्बत के पर्यावरण की ओर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान खींचने के लिए धर्मशाला स्थित केंद्रीय तिब्बती प्रशासन की लगातार कोशिशों के बावजूद, पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी बहुत कम संस्थाओं ने ही इस पर प्रतिक्रिया दी है। तिब्बती पठार पर चीनी सरकार विकास के नाम पर पर्यावरण को नुकसान पंहुचाने वाली कई गतिविधियां कर रही है, जिससे तापमान दोगुनी तेज़ी से बढ़ रहा है। इन दिनों, चीनी सरकार हिमालयी क्षेत्र में खुलेआम और लगातार ऐसी परियोजनाओं का विस्तार कर रही है जिन्हें ग्रीन (पर्यावरण-अनुकूल) ऊर्जा स्रोतों का नाम दिया गया है। इनमें जलाशय और बांध बनाना, सौर ऊर्जा परियोजनाएएं और रेलवे-लिंकिंग परियोजनाएं भी शामिल हैं।

ये गैर-ज़िम्मेदाराना हरकतें पूरी मानवता को भारी नुकसान पंहुचा रही हैं। ऐसे हालात में चुप रहने का समय नहीं है, क्योंकि इनसे भविष्य में और भी गंभीर खतरे पैदा हो सकते हैं।

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