Dharamsala,धर्मशाला: कांगड़ा जिले के विभाजन का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है, जब मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने देहरा उपमंडल में पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय खोलने की घोषणा की। अगर देहरा उपमंडल में एसपी कार्यालय बनता है, तो जिले में नूरपुर और कांगड़ा सहित तीन पुलिस जिले हो जाएंगे। देहरा विधानसभा उपचुनाव के लिए चुनाव प्रचार जोरों पर है, जहां मुख्यमंत्री की पत्नी कमलेश ठाकुर कांग्रेस की उम्मीदवार हैं। यह पहली बार नहीं है कि कांगड़ा जिले के विभाजन का विचार सामने आया है। पिछली भाजपा सरकार ने कांगड़ा के नूरपुर उपमंडल में एसपी कार्यालय इस तर्क के साथ खोला था कि पंजाब की सीमा से सटे इस क्षेत्र में नशे की समस्या है, जिसका समाधान पुलिस जिला बनाकर ही किया जा सकता है। आबादी के लिहाज से सबसे बड़ा जिला होने के कारण कांगड़ा हमेशा से ही राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रहा है। 1998 से 2003 तक भाजपा के शासनकाल में तत्कालीन मुख्यमंत्री पीके धूमल ने कांगड़ा को विभाजित करने का पहला प्रयास किया था।
2003 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री ने पालमपुर, नूरपुर और देहरा उपखंडों में अतिरिक्त उपायुक्तों को बैठाकर यह विचार पेश किया था कि कांगड़ा को छोटे जिलों में विभाजित किया जा सकता है। हालांकि, इस कदम से भाजपा को चुनावी लाभ नहीं मिला, क्योंकि वह चुनाव हार गई और अगली कांग्रेस सरकार ने उक्त उपखंडों में एडीसी के कार्यालय बंद कर दिए। जनसंख्या के लिहाज से कांगड़ा राज्य का सबसे बड़ा जिला है। इसमें 15 विधानसभा क्षेत्र हैं और सरकार बनाने में इसकी अहम भूमिका होती है। आंकड़ों से पता चलता है कि जो भी राजनीतिक दल कांगड़ा में नौ या 10 सीटें जीतता है, वह राज्य में सरकार बनाता है। 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने जिले में 10 सीटें जीतकर सरकार बनाई।
हिमाचल प्रदेश विधानसभा में 68 में से 15 विधायक इसी जिले से आते हैं, इसलिए सरकार में कांगड़ा को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने का मुद्दा हमेशा उठता रहा है। कांग्रेस और भाजपा के लगातार मुख्यमंत्रियों को कांगड़ा के खिलाफ कथित पक्षपात को लेकर जिले में असंतोष का सामना करना पड़ा है। उन्हें हमेशा कांगड़ा के उन प्रमुख नेताओं से खतरा महसूस होता रहा है जो खुद को मुख्यमंत्री पद का दावेदार मानते हैं। सुखू को अपने मंत्रिमंडल में कांगड़ा को पर्याप्त प्रतिनिधित्व न देने के लिए आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा था। विभाजन के बावजूद कांगड़ा राजनीतिक रूप से अभी भी राज्य का सबसे महत्वपूर्ण जिला है, जिससे छोटे जिलों से राज्य में सर्वोच्च पद पर पहुंचने वाले नेता असुरक्षित महसूस करते हैं। भाजपा ने देहरा में एसपी कार्यालय खोलने की घोषणा को चुनावी हथकंडा करार दिया है, लेकिन उसने इस विचार का विरोध नहीं किया है।
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