Delhi में दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय पुरस्कार: लोहारड़ी और शांशा पंचायत को मिली मान्यता
Himachal Pradesh हिमाचल प्रदेश : हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के बल्ह उपमंडल की लोहारड़ी पंचायत और लाहुल-स्पीति जिले की शांशा पंचायत को बुधवार को दिल्ली में आयोजित समारोह में दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। शांशा पंचायत को सामाजिक न्याय एवं सामाजिक सुरक्षा श्रेणी में संयुक्त रूप से प्रथम स्थान प्राप्त हुआ, जबकि लोहारड़ी पंचायत को हरित श्रेणी में देश में तीसरे स्थान पर रहने के लिए पुरस्कृत किया गया।
पुरस्कार वितरण समारोह में केंद्रीय पंचायतीराज मंत्री राजीव रंजन सिंह ने दोनों पंचायतों को सम्मानित किया। मंडी जिले से जिला पंचायत अधिकारी अंचित डोगरा, पंचायत सचिव पुष्पा देवी और रजत शर्मा भी इस अवसर पर उपस्थित थे। लोहारड़ी पंचायत के पूर्व प्रधान रोशन बबलू और महिला मंडलों ने भी हरित पहल में योगदान दिया।
लोहारड़ी पंचायत ने पर्यावरण संरक्षण, पहाड़ को भूस्खलन से बचाने और स्वच्छता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण काम किया है। पंचायत ने अपने पांचों वार्ड में खाली पड़ी भूमि में 10,000 से अधिक पौधे लगाए हैं। इनमें बाण, देवदार, औषधीय और अन्य आवश्यक पौधे शामिल हैं। बैरकोट के जंगल को विकसित करने का काम भी पंचायत द्वारा किया गया है, जिसमें करीब 5,000 देवदार के पेड़ लगाए गए हैं। इस जंगल से लकड़ी केवल अति आवश्यक होने पर ही दी जाती है, जिससे वन संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।
शांशा पंचायत ने सामाजिक न्याय और सुरक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रयास किए हैं। पंचायत ने महिलाओं, बुजुर्गों और जरूरतमंदों के कल्याण के लिए कई योजनाएं लागू की हैं, जिनसे स्थानीय समुदाय को लाभ मिला है। इसके चलते पंचायत को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली और इसे सामाजिक न्याय श्रेणी में प्रथम स्थान दिया गया।
लोहारड़ी और शांशा पंचायत की यह उपलब्धि स्थानीय प्रशासन और पंचायत कार्यकर्ताओं के सतत प्रयासों का परिणाम है। पंचायतों ने अपनी परियोजनाओं में न केवल स्थायित्व और गुणवत्ता पर ध्यान दिया, बल्कि ग्रामीण जनता को भी इसके कार्यों में शामिल किया।
इस पुरस्कार समारोह ने पंचायतों को उनके प्रयासों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दिलाई और अन्य पंचायतों के लिए एक प्रेरणा भी प्रस्तुत की। अधिकारीयों ने बताया कि पुरस्कार मिलने के बाद पंचायतें और अधिक सशक्त होकर ग्रामीण विकास, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक कल्याण की दिशा में काम करेंगी।
लोहारड़ी पंचायत और शांशा पंचायत के प्रयासों से यह स्पष्ट होता है कि छोटे स्तर पर भी यदि सही दिशा में काम किया जाए तो बड़े पैमाने पर सामाजिक और पर्यावरणीय सुधार संभव है।