Chandigarh सूरज सिंह की कस्टडी में हुई मौत के नौ साल पुराने मामले में मुख्य गवाहों में से एक, कॉन्स्टेबल दिनेश कुमार ने सुरक्षा, अपने सस्पेंशन पर रोक और उनसे जुड़ी सभी जांच को हिमाचल प्रदेश से बाहर ट्रांसफर करने की मांग करते हुए एक अर्ज़ी दी है। चंडीगढ़ की CBI कोर्ट ने जनवरी 2025 में 'गुड़िया रेप और मर्डर केस' के आरोपियों में से एक, सूरज सिंह की कस्टडी में हुई मौत के मामले में हिमाचल प्रदेश के इंस्पेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस (IGP) ज़हूर हैदर ज़ैदी और सात अन्य पुलिसकर्मियों को दोषी ठहराया और सभी आरोपियों को उम्रकैद की सज़ा सुनाई।
चंडीगढ़ विटनेस प्रोटेक्शन स्कीम, 2024 के तहत सक्षम अधिकारी (Competent Authority) के सदस्य सचिव को सौंपे गए एक पत्र में, कॉन्स्टेबल दिनेश कुमार ने कहा कि 18 जुलाई 2017 को जब सूरज सिंह की कस्टडी में मौत हुई, तब वे कोटखाई पुलिस स्टेशन में ड्यूटी पर थे। कुमार ने कहा कि उन्होंने चंडीगढ़ की CBI कोर्ट के सामने इस मामले में अपना सच्चा बयान दिया था। उन्होंने कहा कि उनके बयान के बाद, एक IGP समेत आठ लोगों को दोषी ठहराया गया और उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई।
कुमार ने कहा कि बयान देने के बाद से ही उन्हें नौकरी में लगातार परेशानी और उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि डेढ़ महीने में उनका पांच बार ट्रांसफर किया गया, वह भी सिर्फ़ ज़ुबानी आदेश पर और बिना किसी लिखित आदेश के। उन्होंने आगे कहा कि उन्हें झूठे आधार पर नौकरी से सस्पेंड कर दिया गया था। उन्होंने दावा किया कि उनके सस्पेंशन का आधार लोक भवन में उनके द्वारा की गई एक शिकायत को बताया गया था।
कुमार ने कहा कि उन्होंने लोक भवन में कभी कोई शिकायत (लिखित या ज़ुबानी) नहीं की थी, बल्कि सिर्फ़ मानवीय आधार पर मदद मांगी थी क्योंकि उनका बेटा दिव्यांग है और उनका बार-बार ट्रांसफर किया जा रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि DGP ऑफिस ने उस मानवीय अपील को गलत तरीके से शिकायत मान लिया और उनका सस्पेंशन ऑर्डर इसी झूठे आधार पर जारी किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि 9 जून 2026 को उन्हें SSP के चैंबर में बुलाया गया और धमकी दी गई।
कुमार ने कहा कि उन्हें भरोसा नहीं है कि DGP द्वारा नियुक्त कोई भी अधिकारी, चाहे वह किसी दूसरे ज़िले या रेंज का ही क्यों न हो, निष्पक्ष जांच करेगा। उन्होंने हिमाचल प्रदेश पुलिस से पूरी तरह अलग किसी एजेंसी से जांच की मांग की, जैसे कि CBI (जिसने पहले ही इस मामले की जांच की थी), चंडीगढ़ पुलिस, कोई रिटायर्ड ज़िला जज या हाई कोर्ट की बनाई स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT)।
उन्होंने 'कैटेगरी-A' गवाह सुरक्षा की भी मांग की।
4 जुलाई 2017 को हिमाचल प्रदेश के कोटखाई में 16 साल की एक लड़की लापता हो गई थी और दो दिन बाद, 6 जुलाई को उसका शव जंगल में मिला। राज्य में लोगों के भारी विरोध के बीच, एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाई गई। CBI का दावा है कि SIT ने बिना किसी सबूत के 13 जुलाई 2017 को सूरज समेत छह लोगों को गिरफ्तार किया। पुलिस अधिकारियों की एक टीम ने कथित तौर पर सूरज को प्रताड़ित किया ताकि वे अपराध में शामिल होने का कबूलनामा हासिल कर सकें। चोटों के कारण, 18 जुलाई 2017 की रात को शिमला के कोटखाई पुलिस स्टेशन में सूरज की मौत हो गई। सूरज की कस्टडी में मौत के बाद, हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने दोनों मामलों की जांच CBI को सौंप दी।