किन्नर कैलाश यात्रा पर लगी रोक हटी, हाई कोर्ट का बड़ा आदेश

Update: 2026-07-23 14:21 GMT

हिमाचल प्रदेश: प्रसिद्ध धार्मिक स्थल किन्नर कैलाश की वार्षिक यात्रा को लेकर बड़ा फैसला सामने आया है। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने किन्नौर जिले की पोवारी पंचायत द्वारा यात्रा पर लगाए गए स्थायी प्रतिबंध के फैसले पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने साफ कहा कि किसी एक पंचायत को सदियों पुरानी धार्मिक यात्रा को रोकने का कानूनी अधिकार नहीं है। इसके साथ ही हाई कोर्ट ने प्रशासन को सुरक्षा व्यवस्था और तय प्रोटोकॉल के तहत यात्रा को सुचारू रूप से जारी रखने के निर्देश दिए हैं।

मामले की सुनवाई न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की अदालत में हुई। कोर्ट ने पोवारी पंचायत के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि किन्नर कैलाश यात्रा केवल स्थानीय स्तर की गतिविधि नहीं है, बल्कि यह देशभर के श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ी एक प्राचीन धार्मिक परंपरा है। ऐसी यात्रा को रोकने का अधिकार पंचायत के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है।

हाई कोर्ट ने कहा कि किन्नर कैलाश यात्रा का आयोजन राज्य सरकार और जिला प्रशासन की निगरानी में निर्धारित नियमों और सुरक्षा प्रोटोकॉल के अनुसार किया जाता है। इसलिए पंचायत द्वारा यात्रा पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का निर्णय कानूनी रूप से उचित नहीं है। अदालत ने प्रशासन को निर्देश दिया कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यात्रा का संचालन सुनिश्चित किया जाए।

कोर्ट ने पोवारी पंचायत को भी निर्देश दिया है कि वह यात्रा के आयोजन में किसी तरह की बाधा या हस्तक्षेप न करे। अदालत ने संबंधित पक्षों से जवाब दाखिल करने को कहा है और मामले की अगली सुनवाई 10 अगस्त को निर्धारित की गई है।

दरअसल, पोवारी पंचायत ने 13 जुलाई 2026 को ग्राम सभा की विशेष बैठक के बाद किन्नर कैलाश यात्रा को हमेशा के लिए रोकने का प्रस्ताव पारित किया था। पंचायत की बैठक में कुल 112 लोगों ने यात्रा का विरोध किया था, जबकि 62 लोगों ने इसके समर्थन में अपनी राय रखी थी। बहुमत के आधार पर पंचायत ने यात्रा पर स्थायी रोक लगाने का फैसला लिया था।

इसके साथ ही पंचायत ने यात्रा के संचालन से जुड़ी पंजीकृत संस्था श्री प्रकाशंकरा किन्नर कैलाश यात्रा सोसायटी को भी अवैध बताते हुए भंग करने का आदेश जारी कर दिया था। पंचायत के इस फैसले के खिलाफ यात्रा आयोजकों की ओर से हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया था।

याचिका में कहा गया था कि किन्नर कैलाश यात्रा कई वर्षों से धार्मिक आस्था और परंपरा के तहत आयोजित होती आ रही है। यह यात्रा केवल किन्नौर ही नहीं, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन है। याचिकाकर्ताओं ने पंचायत के फैसले को अधिकार क्षेत्र से बाहर बताते हुए इसे चुनौती दी थी।

हाई कोर्ट के फैसले के बाद श्रद्धालुओं और यात्रा आयोजकों में राहत की भावना है। इस वर्ष किन्नर कैलाश यात्रा एक जुलाई से शुरू हो चुकी है और निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 30 जुलाई तक जारी रहेगी। प्रशासन की ओर से यात्रा मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था, स्वास्थ्य सुविधाओं और अन्य जरूरी इंतजामों की निगरानी की जा रही है।

किन्नर कैलाश यात्रा हिमाचल प्रदेश की सबसे कठिन और महत्वपूर्ण धार्मिक यात्राओं में शामिल है। समुद्र तल से करीब 17 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित किन्नर कैलाश शिवलिंग के दर्शन के लिए हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। कठिन पहाड़ी रास्तों और मौसम की चुनौतियों के बावजूद श्रद्धालुओं में इस यात्रा को लेकर गहरी आस्था रहती है।

हाई कोर्ट के इस फैसले से साफ हो गया है कि धार्मिक यात्राओं और परंपराओं से जुड़े मामलों में स्थानीय संस्थाओं को भी कानूनी सीमाओं के भीतर रहकर ही निर्णय लेना होगा। अदालत ने प्रशासन को श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने और धार्मिक आयोजन को शांतिपूर्ण तरीके से पूरा कराने की जिम्मेदारी सौंपी है।

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