शिमला। हिमाचल प्रदेश में ठोस कचरा प्रबंधन को प्रभावी बनाने और लोगों को नए नियमों की जानकारी देने के उद्देश्य से राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जागरूकता अभियान शुरू किया है। इसी अभियान के तहत बुधवार, 23 सितंबर को हिमाचल प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। इसका उद्देश्य देशव्यापी जागरूकता अभियान के तहत नए अधिसूचित ‘सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2026’ के प्रावधानों और हिमाचल प्रदेश में इनके प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर लोगों को जानकारी देना था।‘सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2026’ एक अप्रैल 2026 से लागू हो चुके हैं। इन नए नियमों ने वर्ष 2016 में लागू किए गए पुराने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों का स्थान लिया है। नए नियमों के दायरे में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ व्यावसायिक प्रतिष्ठान, संस्थागत परिसर और सरकारी संस्थान भी शामिल हैं। नियमों का मुख्य उद्देश्य कचरे के स्रोत पर ही उचित पृथक्करण, संग्रहण, प्रसंस्करण और सुरक्षित निपटान की व्यवस्था को मजबूत करना है।प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हिमाचल प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सेक्रेटरी-कम-मेंबर सेक्रेटरी सुशील कुमार सिंगला (IFS) ने प्रभावी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि नए नियमों के तहत कचरे को उसके स्रोत पर ही अलग-अलग श्रेणियों में बांटना जरूरी है। इसके लिए कचरे को चार प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया गया है।इन चार श्रेणियों में **गीला कचरा, सूखा कचरा, सैनिटरी कचरा और विशेष देखभाल वाला कचरा** शामिल हैं। कचरे को शुरुआत में ही अलग-अलग करने से उसके आगे के प्रसंस्करण और निपटान की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाया जा सकता है।
गीले कचरे में जैविक सामग्री
नियमों के तहत गीले कचरे में बायोडिग्रेडेबल यानी आसानी से जैविक रूप से विघटित होने वाली सामग्री शामिल होगी। इसमें रसोई से निकलने वाला कचरा, भोजन से संबंधित अवशेष और अन्य जैविक कचरा प्रमुख हैं। ऐसे कचरे को सूखे या अन्य प्रकार के कचरे के साथ मिलाने के बजाय अलग रखना होगा।गीले कचरे का स्रोत पर पृथक्करण होने से इसके प्रसंस्करण और उपयोग की संभावनाएं बढ़ती हैं। जैविक कचरे का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन करने से इसे उपयोगी संसाधन में बदलने और कचरे के अंतिम निपटान का बोझ कम करने में मदद मिल सकती है।
सूखा कचरा भी करना होगा अलग
दूसरी श्रेणी सूखे कचरे की है। इसमें ऐसी वस्तुएं शामिल हैं जिन्हें दोबारा उपयोग या पुनर्चक्रण के लिए भेजा जा सकता है। कागज, कार्डबोर्ड, प्लास्टिक, कांच और धातु जैसी सामग्री इसके अंतर्गत आती है।नए नियमों के तहत ऐसे कचरे को गीले कचरे से अलग रखना जरूरी है। इससे रिसाइकिल होने वाली सामग्री को अलग से एकत्र करने और उसे आगे पुनर्चक्रण की प्रक्रिया में भेजने में सुविधा होगी। अधिकारियों ने लोगों से कचरे को घरों और संस्थानों के स्तर पर ही अलग करने की अपील की।
सैनिटरी कचरे के लिए विशेष व्यवस्था
सैनिटरी कचरे को भी अलग श्रेणी में रखा गया है। इसमें इस्तेमाल किए गए डायपर, सैनिटरी टॉवल और सैनिटरी पैड जैसी वस्तुएं शामिल हैं। इन वस्तुओं को अन्य कचरे के साथ खुले तौर पर मिलाने के बजाय निर्धारित तरीके से सुरक्षित रखना जरूरी होगा।नियमों के अनुसार सैनिटरी कचरे को सौंपने से पहले निर्माता या ब्रांड की ओर से उपलब्ध कराए गए पाउच या रैपिंग सामग्री में सुरक्षित रूप से लपेटना आवश्यक है। इससे संग्रहण और निपटान के दौरान स्वच्छता तथा सुरक्षा संबंधी जोखिमों को कम करने में मदद मिल सकती है।
विशेष देखभाल वाले कचरे पर भी जोर
चौथी श्रेणी में विशेष देखभाल वाला कचरा शामिल है। इसमें ऐसे कचरे को रखा गया है जिसके निपटान में विशेष सावधानी की आवश्यकता होती है। इसके अंतर्गत CFL बल्ब, फ्लोरोसेंट ट्यूब, एक्सपायर हो चुकी दवाएं, पेंट के डिब्बे, इस्तेमाल की गई सीरिंज, टूटे हुए मरकरी थर्मामीटर और बैटरियां शामिल हैं।इस तरह के कचरे को सामान्य गीले या सूखे कचरे में डालना उचित नहीं है। इसमें मौजूद कुछ पदार्थ पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर सकते हैं। इसलिए इनके लिए अलग संग्रहण और सुरक्षित निपटान की व्यवस्था पर जोर दिया गया है।
हिमाचल में प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर
प्रेस कॉन्फ्रेंस का मुख्य उद्देश्य केवल नए नियमों की जानकारी देना ही नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश में इनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए लोगों और संबंधित संस्थाओं को जागरूक करना भी था। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन केवल स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें नागरिकों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, संस्थानों और सरकारी विभागों की भी भूमिका है।कचरे को स्रोत पर अलग करने की व्यवस्था को प्रभावी बनाने से आगे की पूरी प्रक्रिया आसान हो सकती है। अलग-अलग श्रेणियों में कचरा मिलने पर उसके संग्रहण, परिवहन, प्रसंस्करण और निपटान को वैज्ञानिक तरीके से संचालित किया जा सकता है।राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से चलाया जा रहा जागरूकता अभियान लोगों को नए नियमों की जानकारी देने और उनके व्यवहार में बदलाव लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है। नए नियमों के तहत कचरे का पृथक्करण घर, दुकान, कार्यालय, संस्थान और अन्य प्रतिष्ठानों से ही शुरू करने पर जोर दिया गया है।हिमाचल प्रदेश में पर्यटन, शहरीकरण और आबादी के विभिन्न क्षेत्रों में विस्तार के साथ ठोस कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन की आवश्यकता भी बढ़ रही है। ऐसे में नए नियमों के प्रावधानों के बारे में व्यापक जागरूकता और उनका प्रभावी पालन राज्य में स्वच्छता तथा पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
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