अंतर्राष्ट्रीय कुल्लू दशहरा ने एक बार फिर खुद को एक ऐसे मंच के रूप में स्थापित किया है, जहाँ परंपरा और आधुनिकता का मिलन होता है। ऐतिहासिक रथ मैदान में आयोजित 'ग्लोबल डांस' कार्यक्रम में अमेरिका, रूस, इंडोनेशिया, कजाकिस्तान और मलेशिया सहित लगभग 15 देशों के कलाकारों ने लद्दाख, स्पीति और हिमाचल के अन्य हिस्सों के कलाकारों के साथ मिलकर प्रस्तुतियां दीं। पारंपरिक वेशभूषा में सजे इन कलाकारों ने अपनी स्थानीय परंपराओं, लोक संस्कृति और जीवन शैली की झलक पेश की। गुरुवार को आयोजित सांस्कृतिक संध्या में उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उत्सव समिति के अध्यक्ष और विधायक सुंदर सिंह ठाकुर ने कुल्लवी टोपी और शॉल भेंट कर उनका स्वागत किया। कार्यक्रम से पहले, उप मुख्यमंत्री ने भगवान रघुनाथ के अस्थायी शिविर का दौरा किया और उत्सव स्थल पर लगाई गई प्रदर्शनी देखी।
अग्निहोत्री ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय कुल्लू दशहरा हिमाचल का सबसे बड़ा मेला है, जो राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपराओं और 'देव संस्कृति' को दुनिया के सामने ला रहा है। उन्होंने कहा कि समय के साथ इस उत्सव का स्वरूप काफी व्यापक हुआ है और यह एक भव्य अंतर्राष्ट्रीय आयोजन के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। उन्होंने उत्सव को और अधिक शानदार बनाने के लिए विधायक सुंदर सिंह ठाकुर के प्रयासों की सराहना की और इसके निरंतर सफल होने की कामना की।
ये प्रस्तुतियां विभिन्न देशों और संस्कृतियों के बीच आपसी समझ, सद्भाव और मित्रता को मजबूत करने का एक सशक्त माध्यम बनीं। जब प्रसिद्ध पहाड़ी धुन "लगा डोलो रा धमाका" पर पारंपरिक 'नाटी' नृत्य प्रस्तुत किया गया, तो विदेशी कलाकार भी इसकी ताल पर थिरकने लगे, जो सांस्कृतिक एकता और सद्भावना का संदेश देता है। इस तरह के आदान-प्रदान से हिमाचल के लोगों को अन्य संस्कृतियों के बारे में जानने का मौका मिलता है, वहीं यहाँ आने वाले कलाकार राज्य की समृद्ध लोक कला और परंपराओं से परिचित होते हैं।
इस वर्ष के उत्सव का मुख्य आकर्षण 500 ड्रोन्स का एक विशेष शो रहा, जो लगभग आधे घंटे तक चला। इन ड्रोन्स के जरिए भगवान राम के वनवास से लेकर लंका दहन तक की कथा को दर्शाया गया, साथ ही इसमें हिमाचली संस्कृति की झलक भी देखने को मिली। ढालपुर मैदान के ऊपर हुआ यह समन्वित प्रदर्शन दर्शकों के लिए बेहद उत्साहजनक रहा; यहाँ मौजूद विदेशी पर्यटकों ने भी इस अद्भुत नज़ारे को अपने कैमरों में कैद किया। रथ मैदान में लेज़र लाइट शो ने भी दर्शकों का ध्यान खींचा। आधुनिक तकनीक और सांस्कृतिक कथाओं के इस मेल ने उत्सव में एक नया आयाम जोड़ दिया। दूसरी सांस्कृतिक शाम में गायक सलमान अली, विक्की राजता, आयुष और दिव्या श्रीवास्तव ने अपनी प्रस्तुतियां दीं। सलमान अली ने बॉलीवुड के लोकप्रिय गीतों से सबका दिल जीत लिया, वहीं विक्की राजता ने पहाड़ी गीत पेश किए, जिन्होंने हिमाचली लोक संगीत को सबके सामने रखा। उनकी प्रस्तुतियों ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया और इस शाम को यादगार बना दिया।
Tags: