भिवानी : हरियाणा के भिवानी जिले के बहल इलाके में केमिकल से भरे टैंकर के पलटने के बाद बड़ा हादसा सामने आया। टैंकर से निकले केमिकल में आग लगने के बाद देखते ही देखते पूरा क्षेत्र धुएं और आग की लपटों से घिर गया। हादसे के बाद आसपास के लोगों में अफरा-तफरी मच गई। आग इतनी तेजी से फैली कि सड़क किनारे मौजूद कई दुकानें और ठेले भी इसकी चपेट में आ गए। राहत और बचाव के लिए कई दमकल गाड़ियां मौके पर भेजी गईं।

इस हादसे ने एक बार फिर खतरनाक रसायनों के परिवहन और उनके इस्तेमाल को लेकर चिंता बढ़ा दी है। जिस केमिकल के कारण यह स्थिति बनी, उसे जाइलीन (Xylene) बताया जा रहा है। यह एक ज्वलनशील रसायन है, जिसका इस्तेमाल कई औद्योगिक कामों में किया जाता है।
क्या है जाइलीन केमिकल?
जाइलीन एक एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन रसायन है। इसका रासायनिक सूत्र C₈H₁₀ होता है। यह आमतौर पर रंगहीन तरल पदार्थ होता है और इसमें एक खास तरह की गंध होती है। जाइलीन के कई प्रकार होते हैं, जैसे ऑर्थो-जाइलीन, मेटा-जाइलीन और पैरा-जाइलीन। यह केमिकल मुख्य रूप से उद्योगों में सॉल्वेंट के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। पेंट, कोटिंग, प्रिंटिंग इंक, रबर, प्लास्टिक और कई रासायनिक उत्पादों के निर्माण में इसका उपयोग होता है।
कितना खतरनाक है जाइलीन?
जाइलीन का सबसे बड़ा खतरा इसकी ज्वलनशीलता है। यह आसानी से आग पकड़ सकता है और इसके वाष्प भी आग के संपर्क में आने पर खतरनाक स्थिति पैदा कर सकते हैं।अगर बड़ी मात्रा में जाइलीन लीक हो जाए तो आसपास के इलाके में आग फैलने का खतरा बढ़ जाता है। इसके धुएं के संपर्क में आने से स्वास्थ्य पर भी असर पड़ सकता है। लंबे समय तक जाइलीन के संपर्क में रहने से सिर दर्द, चक्कर आना, आंखों में जलन, सांस लेने में परेशानी और तंत्रिका तंत्र पर असर जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
कहां-कहां होता है इस्तेमाल?
जाइलीन का उपयोग कई उद्योगों में किया जाता है। इसके प्रमुख इस्तेमाल इस प्रकार हैं—
पेंट और वार्निश बनाने में
औद्योगिक सॉल्वेंट के रूप में
प्रिंटिंग इंक में
प्लास्टिक और रबर उद्योग में
रासायनिक उत्पादन में
प्रयोगशालाओं में कुछ प्रक्रियाओं के लिए
टैंकर हादसे में इतना बड़ा खतरा क्यों?
केमिकल टैंकर में बड़ी मात्रा में ज्वलनशील पदार्थ ले जाए जाते हैं। अगर दुर्घटना के बाद टैंकर से रिसाव हो जाए और किसी वजह से आग पकड़ ले तो स्थिति तेजी से गंभीर हो सकती है। ऐसे मामलों में दमकल कर्मियों को भी विशेष सावधानी बरतनी पड़ती है, क्योंकि सामान्य आग बुझाने के तरीके हर रसायन पर प्रभावी नहीं होते।
सुरक्षा नियमों का महत्व
ज्वलनशील केमिकल के परिवहन के दौरान विशेष सुरक्षा नियमों का पालन जरूरी होता है। टैंकर की सही पैकिंग, चालक की ट्रेनिंग, आपातकालीन उपकरण और रिसाव रोकने की व्यवस्था हादसों के खतरे को कम कर सकती है। भिवानी के बहल में हुए हादसे ने दिखाया कि खतरनाक रसायनों की छोटी सी लापरवाही भी बड़े नुकसान का कारण बन सकती है। फिलहाल प्रशासन की ओर से हादसे के कारणों और नुकसान का आकलन किया जा रहा है।

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