Rohtak पं. भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय, रोहतक में एमबीबीएस-2026 बैच के नव प्रवेशित छात्रों के लिए एक भव्य व्हाइट कोट समारोह का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि रहे कुलपति डॉ. एचके अग्रवाल ने कहा कि सफेद कोट केवल एक परिधान नहीं है बल्कि मानवता के प्रति जिम्मेदारी, अखंडता और सेवा का प्रतीक है। उन्होंने छात्रों से कहा, "आज से आप डॉक्टर बनने की यात्रा पर निकल पड़े हैं। यह कोट आपको लगातार याद दिलाएगा कि मरीज की सेवा करना आपका प्राथमिक कर्तव्य है।"
पीजीआईएमएस, रोहतक के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए डॉ. अग्रवाल ने कहा कि संस्थान से प्रशिक्षित डॉक्टर देश और विदेश में इसका नाम रोशन कर रहे हैं। उन्होंने छात्रों से कड़ी मेहनत, अनुशासन और करुणा के साथ अपनी पढ़ाई जारी रखने का आग्रह किया। चिकित्सा को सर्वोत्तम पेशा बताते हुए उन्होंने कहा कि यह एक ऐसा क्षेत्र है जहां पैसा नहीं बल्कि दुआएं कमाई जाती हैं। उन्होंने छात्रों से शैक्षणिक शिक्षा के साथ-साथ मानवीय सहानुभूति विकसित करने का आह्वान किया।
रजिस्ट्रार डॉ. रूप सिंह ने कहा कि एमबीबीएस कार्यक्रम में प्रवेश पाना अंतिम लक्ष्य नहीं है और असली परीक्षा इसके बाद शुरू होती है। उन्होंने कहा, "अगले पांच साल आपके जीवन के सबसे महत्वपूर्ण साल हैं। अनुशासन, समय की पाबंदी और नैतिकता ही आपको अच्छे डॉक्टर बनाएगी।"
उन्होंने छात्रों को आश्वासन दिया कि विश्वविद्यालय प्रशासन हर संभव सुविधा प्रदान करेगा, लेकिन उनसे संस्थान की प्रतिष्ठा को बनाए रखने और बढ़ाने की भी अपेक्षा की। उन्होंने रैगिंग मुक्त परिसर के लिए विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता पर जोर दिया और वरिष्ठों और कनिष्ठों से एक परिवार की तरह एक साथ रहने का आग्रह किया। पीजीआईएमएस के निदेशक डॉ. एसके सिंघल ने कहा कि किताबी ज्ञान छात्रों को परीक्षा उत्तीर्ण करने में मदद कर सकता है, लेकिन सच्चे डॉक्टर मरीजों के साथ बातचीत करते हुए वार्डों में बनते हैं। उन्होंने कहा कि पीजीआईएमएस में मरीजों की संख्या बहुत अधिक है, जिससे छात्रों को सीखने का जबरदस्त अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि वे जितने अधिक रोगियों की जांच करेंगे, वे उतना ही अधिक सीखेंगे। इस अवसर पर उपस्थित लोगों में डॉ. एमजी वशिष्ठ, डॉ. सुजाता सेठी, डॉ. अशोक चौहान, डॉ. सविता सिंघल, डॉ. विवेक मलिक और डॉ. मंजूनाथ बीसी शामिल थे।
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