हिसार: हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के जूलॉजी विभाग में विद्यार्थियों और शिक्षकों के बीच संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बीआर कम्बोज ने विद्यार्थियों को वैज्ञानिक सोच विकसित करने तथा शोध और नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता में गिरावट जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए वैज्ञानिक शोध और आधुनिक तकनीकों को अपनाना जरूरी है।

एआई और जैव प्रौद्योगिकी से खुलेंगी शोध की नई संभावनाएं

कुलपति प्रो. बीआर कम्बोज ने बुधवार को कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), जैव प्रौद्योगिकी, आनुवंशिकी और जैव सूचना विज्ञान जैसी आधुनिक तकनीकें प्राणी विज्ञान के क्षेत्र में शोध की नई संभावनाएं पैदा कर रही हैं।

उन्होंने बताया कि इन तकनीकों की मदद से वन्यजीवों की निगरानी, जीवों में होने वाली बीमारियों को समझने और जैव विविधता के संरक्षण के लिए प्रभावी उपाय विकसित करने में सहायता मिल सकती है। उन्होंने विद्यार्थियों से इन तकनीकों का ज्ञान हासिल करने और शोध एवं नवाचार के क्षेत्र में अपनी रुचि विकसित करने का आह्वान किया।

किताबी ज्ञान के साथ व्यावहारिक अनुभव भी जरूरी

प्रो. कम्बोज ने कहा कि विद्यार्थियों के लिए किताबी ज्ञान के साथ व्यावहारिक अनुभव, प्रभावी संवाद कौशल और टीम भावना विकसित करना भी आवश्यक है। ये क्षमताएं उन्हें भविष्य की चुनौतियों का बेहतर तरीके से सामना करने में मदद करती हैं।

उन्होंने शिक्षकों से विद्यार्थियों को शोध के नए विषयों की पहचान करने के लिए प्रेरित करने, नवाचार को बढ़ावा देने और गुणवत्तापूर्ण शोध के लिए प्रोत्साहित करने का आह्वान किया।

कुलपति ने कहा कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण, निरंतर सीखने की प्रवृत्ति और व्यावहारिक अनुभव विद्यार्थियों के शैक्षणिक एवं व्यावसायिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आधुनिक तकनीकों का ज्ञान हासिल कर विद्यार्थी शोध के क्षेत्र में नए अवसर तलाश सकते हैं और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी चुनौतियों के समाधान में योगदान दे सकते हैं।

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