Gurugram सुप्रीम कोर्ट ने गुरुग्राम में इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी की ओर इशारा करते हुए कहा कि बारिश के दौरान "मिलेनियम सिटी" का सिस्टम ठप हो जाता है, जबकि ग्रेटर नोएडा की भविष्य की प्लानिंग के लिए तारीफ़ की। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि गुरुग्राम में बारिश के दौरान सिस्टम इसलिए ठप हो जाता है क्योंकि ड्रेनेज और सीवेज सिस्टम जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने में निवेश नहीं किया गया।
CJI ने कहा, "हमने गुरुग्राम में देखा है कि किसी भी प्राकृतिक आपदा के आने पर सिस्टम कैसे ठप हो जाता है। क्योंकि, बिना इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाए, आप प्लॉट के साइज़ पर कई मंज़िलों का बोझ डाल रहे हैं।" ग्रेटर नोएडा के बारे में कोर्ट ने कहा कि वहाँ हालात अलग हैं क्योंकि उसे अगले 30-40 सालों को ध्यान में रखकर प्लान किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट की ये टिप्पणियाँ कर्नाटक हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान आईं, जिसमें राज्य सरकार की प्रीमियम फ्लोर एरिया रेश्यो (FAR) स्कीम को सही ठहराया गया था। प्रीमियम FAR स्कीम प्रॉपर्टी मालिकों को तय प्रीमियम चार्ज देकर सामान्य रूप से मंज़ूर FAR से ज़्यादा कंस्ट्रक्शन राइट्स खरीदने की इजाज़त देती है, ताकि वर्टिकल डेवलपमेंट को बढ़ावा दिया जा सके और शहरी लोकल बॉडीज़ के लिए रेवेन्यू जुटाया जा सके। FAR किसी बिल्डिंग के कुल फ्लोर एरिया (ग्रॉस फ्लोर एरिया) और उस ज़मीन के टुकड़े के साइज़ का अनुपात है जिस पर वह बनी है।
बेंच, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल थे, ने 'सिटिज़न्स एक्शन फ़ोरम' की याचिका पर नोटिस जारी किया। कोर्ट ने साफ़ किया कि अतिरिक्त FAR का इस्तेमाल अवैध कंस्ट्रक्शन को रेगुलर करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। याचिकाकर्ता की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट आदित्य सोंधी ने कहा कि प्रीमियम FAR देने के लिए सड़क की चौड़ाई ही असल में एकमात्र पैमाना बन गई है, जिससे बेंगलुरु में पार्किंग, पानी, बिजली और दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर पर पहले से मौजूद दबाव को ठीक से ध्यान में रखे बिना काफ़ी ज़्यादा अतिरिक्त कंस्ट्रक्शन की इजाज़त मिल जाती है।
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