हिसार: गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में यूथ रेड क्रॉस इकाई की ओर से टीबी के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से स्वास्थ्य जागरूकता सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता डिप्टी सिविल सर्जन (टीबी) डॉ. जितेन्द्र शर्मा ने विद्यार्थियों एवं स्वयंसेवकों को टीबी के कारण, लक्षण, जांच, उपचार और बचाव के उपायों की जानकारी दी।

डॉ. जितेन्द्र शर्मा ने शनिवार को कहा कि टीबी आज भी प्रमुख स्वास्थ्य चुनौतियों में शामिल है, हालांकि यह पूरी तरह उपचार योग्य बीमारी है। उन्होंने कहा कि टीबी को जड़ से समाप्त करने के लिए चिकित्सा विज्ञान, आधुनिक तकनीक और समाज की सामूहिक भागीदारी जरूरी है। आधुनिक जांच तकनीकों से कम समय में टीबी की सटीक पहचान संभव हुई है तथा औषधि-प्रतिरोधी टीबी के उपचार में भी महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। चिकित्सक की सलाह के बिना टीबी की दवाएं बीच में बंद नहीं करनी चाहिए, क्योंकि अधूरा उपचार बीमारी के दोबारा बढ़ने और दवाओं के प्रति प्रतिरोध विकसित होने का खतरा बढ़ा सकता है।

डॉ. शर्मा ने ‘निक्षय पोषण योजना’ और ‘प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान’ की जानकारी देते हुए कहा कि निक्षय पोषण योजना के माध्यम से टीबी रोगियों को उपचार के दौरान पोषण संबंधी सहायता दी जाती है। उन्होंने विद्यार्थियों और स्वयंसेवकों से ‘निक्षय मित्र’ बनकर टीबी रोगियों को सहयोग तथा पौष्टिक आहार उपलब्ध करवाने की अपील की।

कार्यक्रम के आरंभ में यूथ रेड क्रॉस इकाई के कार्यक्रम समन्वयक डॉ. महावीर प्रसाद ने मुख्य वक्ता और अतिथियों का स्वागत किया। जिला नागरिक अस्पताल से मनदीप मलिक और जगत सिंह ने स्वयंसेवकों को ‘निक्षय’ मोबाइल अनुप्रयोग डाउनलोड करने तथा टीबी रोगियों को सहयोग एवं गोद लेने की प्रक्रिया की जानकारी दी। उन्होंने रोगियों के प्रति संवेदनशील व्यवहार रखने और उन्हें उपचार पूरा करने के लिए प्रोत्साहित करने पर जोर दिया।

कार्यक्रम में करीब 150 यूथ रेड क्रॉस स्वयंसेवकों ने भाग लिया। स्वयंसेवकों ने टीबी से संबंधित जानकारी प्राप्त करने के साथ समाज में जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया। इस अवसर पर नर्सिंग विभाग की प्राध्यापक रितु सोनी, कोयल, सोनू, अनसूइया, आभा नरवाल, विपिन कुमार तथा यूथ रेड क्रॉस के क्षेत्रीय समन्वयक सुरेंद्र श्योराण सहित अन्य शिक्षक एवं स्वयंसेवक उपस्थित रहे।

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