Panchkula सुरक्षा खामियों की जांच करने के अलावा, सरकार बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और व्यवहार संबंधी भलाई से जुड़े मुद्दों पर भी विचार कर रही है। इसमें मोबाइल फोन का इस्तेमाल और ऑनलाइन मौजूद हिंसक कंटेंट जैसे विषय शामिल हैं। अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्कूली शिक्षा) विजय सिंह दहिया ने कहा कि राज्य सरकार इस घटना को बहुत संवेदनशीलता से ले रही है। सरकार केवल इस एक मामले तक सीमित न रहकर, इससे जुड़े व्यापक मुद्दों की भी जांच कर रही है।
दहिया ने बताया, "सरकार स्कूल सुरक्षा नीति की समीक्षा करने पर विचार कर रही है, ताकि इसमें छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े उपाय शामिल किए जा सकें। इसके अलावा, एक विशेष समिति बनाने पर भी विचार किया जा रहा है। इस समिति में मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ, बाल संरक्षण विशेषज्ञ, शिक्षाविद और मनोवैज्ञानिक शामिल होंगे। इनका काम बच्चों में व्यवहार संबंधी और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं की शुरुआती चरण में पहचान करने के तरीके सुझाना और समय रहते जरूरी कदम उठाना होगा।"
दहिया ने कहा कि नीति की समीक्षा के दौरान उभरते डिजिटल खतरों से बचाव के उपायों पर भी विचार किया जाएगा। इनमें साइबर बुलिंग, AI से बने डीपफेक, ऑनलाइन धोखाधड़ी, अनुचित कंटेंट, डिजिटल शोषण, और ऑनलाइन गेमिंग व जुए से जुड़े जोखिम शामिल हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा, गरिमा, निजता, भावनात्मक भलाई और उनकी उम्र के हिसाब से जरूरतों पर विशेष ध्यान देते हुए एक 'बाल-संवेदनशील' दृष्टिकोण अपनाया जाएगा। उन्होंने आगे कहा, "इस समीक्षा में डिजिटल साक्षरता, AI के जिम्मेदार इस्तेमाल, साइबर सुरक्षा, ऑनलाइन व्यवहार और बाल संरक्षण से जुड़े उचित दिशा-निर्देश भी शामिल किए जा सकते हैं।" इस घटना को देखते हुए, स्कूली बच्चों में व्यवहार संबंधी समस्याओं की जल्द पहचान करना और समय रहते जरूरी कदम उठाना, स्कूली शिक्षा विभाग के एजेंडे में शामिल है।
इसके अलावा, सरकार स्कूल सुरक्षा नीति में बच्चों के मोबाइल फोन इस्तेमाल से जुड़े दिशा-निर्देशों को शामिल करने पर भी विचार कर रही है। फिलहाल, इस नीति में इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं हैं। इन प्रस्तावित उपायों का उद्देश्य स्कूलों और अभिभावकों की मदद करना है, ताकि वे बच्चों में होने वाले व्यवहार संबंधी बदलावों को शुरुआती चरण में ही पहचान सकें और उचित कदम उठा सकें।
अब तक की गई कार्रवाई के तहत, स्कूली शिक्षा विभाग ने कथित लापरवाही के आरोप में स्कूल के प्रिंसिपल और दो JBT शिक्षकों को निलंबित कर दिया है। राज्य सरकार ने पांच सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है और पूरे राज्य में स्कूलों की सुरक्षा का ऑडिट कराने की घोषणा की है। पुलिस ने कथित लापरवाही के लिए स्कूल के प्रिंसिपल, दो शिक्षकों और एक चौकीदार के खिलाफ FIR दर्ज की है। इसके साथ ही, BNS (भारतीय न्याय संहिता) की संबंधित धाराओं के तहत आठ साल के बच्चे के खिलाफ भी एक DDR (दैनिक डायरी रिपोर्ट) दर्ज की गई है। हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने शिक्षा विभाग से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है, जबकि किशोर न्याय बोर्ड ने लड़के को अंबाला के ऑब्जर्वेशन होम (बाल सुधार गृह) भेज दिया है और उसकी मेडिकल जांच के आदेश दिए हैं। इस घटना ने अभिभावकों के बीच चिंता पैदा कर दी है, जो स्कूलों में बेहतर अनुशासन, जवाबदेही और सुरक्षा इंतजामों की मांग कर रहे हैं।
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