निजीकरण के फैसले के खिलाफ सड़क पर उतरे रोडवेज कर्मचारी
बिजली बोर्ड निजीकरण के खिलाफ रोडवेज कर्मचारियों ने बुलंद की आवाज
जींद: हरियाणा रोडवेज कर्मचारी सांझा मोर्चा के आह्वान पर शुक्रवार को बस अड्डे पर बिजली बोर्ड निजीकरण के विरोध में रोडवेज कर्मियों ने प्रदर्शन किया। मांगों को लेकर मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन से पहले रोडवेज कर्मियों ने बस अड्डा परिसर में जमकर नारेबाजी की।
प्रदर्शनकारी रोडवेज कर्मियों को संबोधित करते हुए रामेहर रेढू, जितेंद्र लाठर, सोमबीर जांगड़ा, अनिल शर्मा आदि ने कहा कि बिजली बोर्ड का निजीकरण करने और गुरुग्राम, नूंह जैसे मुनाफे वाले जिलों में निजी कंपनी पावर 11 को 25 साल के लिए पैरेलल लाइसेंस दिया जा रहा है। जिस पर बिजली निगम कर्मचारी आंदोलनरत हैं और तीन दिन की हडताल पर हैं। सांझा मोर्चा के वरिष्ठ सदस्य अनूप लाठर, सुरेंद्र सिंह और संदीप रंगा ने कहा कि पांच व छह सितंबर की हड़ताल के नोटिस के बाद आठ सितंबर को परिवहन मंत्री के साथ बैठक में 12 मुख्य मांगों पर सहमति बनी थी और एक माह में परिपत्र जारी करने का आश्वासन दिया गया था। डेढ़ माह बीत जाने के बाद भी एक भी परिपत्र जारी नहीं हुआ है, जिससे कर्मचारियों में भारी रोष है। उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार मुनाफा देने वाले बिजली विभाग को बेच रही है, दूसरी तरफ रोडवेज में प्राइवेट परमिट देकर रोडवेज को भी निजी हाथों में सौंप रही है। दोनों ही फैसले कर्मचारी और जनता विरोधी हैं। बिजली में निजीकरण से किसानों और आम घरों की सब्सिडी खत्म होगी।। वैसे ही रोडवेज में प्राइवेट परमिट से सरकारी रोजगार खत्म होगा। इसलिए बिजली कर्मचारियों की लड़ाई हमारी अपनी लड़ाई है।
ज्ञापन के माध्यम से सरकार को पांच व छह नवंबर की दो दिवसीय सांकेतिक रोडवेज हड़ताल का नोटिस दिया गया है। यदि चार नवंबर तक हमारी मांगों के परिपत्र जारी नहीं हुए तो प्रदेशभर में रोडवेज का चक्का जाम रहेगा। उन्होंने मांग की कि प्राइवेट परमिट देने की योजना पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए। परिचालक का पे ग्रेड बढ़ाकर लिपिकों के समान तीन वेतन वृद्धि तथा 2008 के वंचित परिचालकों की जल्द प्रमोशन करना। चालकों को स्टैंड इंचार्ज का अलग पद सृजित कर पदोन्नति देना, चालक, परिचालक एवं निरक्षक उप निरीक्षक व कर्मशाला के कर्मचारियों को दे अर्जित अवकाश पूर्व की भांति दिया जाए। 2018 में भर्ती कर्मशाला कर्मचारियों को तकनीकी पदों पर पदोन्नति दी जाए। वर्षों से बकाया बोनस का भुगतान किया जाए। सहायकों के पद बढ़ाया जाए।