हिसार में रोडवेज बसों के पहिए फिर घूमे, यात्रियों को राहत
रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल खत्म, हिसार में बस सेवा बहाल
हिसार: हरियाणा रोडवेज के हिसार डिपो में पिछले पांच दिनों से जारी कर्मचारियों की हड़ताल बुधवार को समाप्त हो गई। डिपो प्रशासन की ओर से लंबित मांगों को पूरा करने और उनके समाधान का लिखित आश्वासन मिलने के बाद सांझा संघर्ष समिति ने आंदोलन खत्म करने की घोषणा की। हड़ताल समाप्त होते ही डिपो से बसों का संचालन सुचारू हो गया। हिसार डिपो और हांसी सब डिपो की 250 से अधिक बसें सड़कों पर लौट आईं, जिससे यात्रियों ने राहत की सांस ली।
लिखित आश्वासन के बाद बनी सहमति
कर्मचारियों की मांगों को लेकर बुधवार को डिपो प्रशासन और सांझा संघर्ष समिति के पदाधिकारियों के बीच वार्ता हुई। बैठक में महाप्रबंधक राहुल मित्तल, यातायात प्रबंधक प्रीतम सिवाच, एसपीओ राजबीर सिंह और सुप्रिटेंडेंट ने कर्मचारियों को आश्वासन दिया कि रात्रि भत्ता, एलटीसी, मेडिकल और एसीपी की बकाया राशि उनके खातों में जमा करवाई जाएगी। इसके अलावा डिपो स्तर पर लंबित अन्य समस्याओं और मामलों का भी जल्द निपटारा किया जाएगा। अधिकारियों की ओर से लिखित आश्वासन मिलने के बाद समिति ने हड़ताल समाप्त करने का निर्णय लिया।
सांझा संघर्ष समिति के प्रेस प्रवक्ता संदीप जैनावास ने कहा कि कर्मचारियों की एकजुटता और पांच दिनों तक चले आंदोलन के कारण प्रशासन को उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेना पड़ा। समिति प्रशासन की ओर से दिए गए लिखित आश्वासन के अनुसार मांगों के समाधान पर नजर रखेगी। कर्मचारियों के हितों से जुड़े मुद्दों पर आगे भी संघर्ष जारी रहेगा।
सेवानिवृत्त कर्मचारी नेताओं ने भी दिया समर्थन
आंदोलन को समर्थन देने के लिए सेवानिवृत्त कर्मचारी नेता एमएल सहगल, राजपाल नैन, बलबीर देसवाल, सुरेंद्र मान और सुभाष ढिल्लो भी पहुंचे। इससे पहले भीम आर्मी नेता संतलाल अंबेडकर और अन्य पदाधिकारियों ने भी रोडवेज कर्मचारियों के आंदोलन का समर्थन किया था।
धरने के दौरान समिति प्रधान राजेश जांगड़ा, पवन कनोह, जितेंद्र शर्मा, जोगेंद्र पंघाल, नरेंद्र खरड़, अरुण शर्मा, बजरंग लाखा, कर्मबीर मसूदपुर, अमित जुगलान, अजय दुहन, वीरेंद्र, राज्य उपप्रधान राजकुमार चौहान और डिपो वरिष्ठ उपप्रधान दयानंद सरसाना सहित अन्य कर्मचारी नेता मौजूद रहे।
हड़ताल के दौरान दो पदाधिकारियों की हाजिरी भी रही चर्चा में
हड़ताल के दौरान डिपो में दो प्रमुख पदाधिकारियों की भूमिका भी चर्चा का विषय बनी रही। कर्मचारियों के अनुसार, दोनों पदाधिकारियों ने हड़ताल में शामिल होने का दावा किया और धरने पर लंबे भाषण दिए, लेकिन इसके बाद अपनी हाजिरी भी लगाई। कर्मचारियों के बीच इस बात को लेकर चर्चा रही कि हड़ताल में शामिल होने के दावे और प्रशासन के यहां हाजिरी लगाने के पीछे उनकी क्या मजबूरी रही। इस घटनाक्रम ने आंदोलन के दौरान डिपो में अलग से चर्चा को जन्म दिया।