रेवाड़ी। शहर में बेसहारा गोवंशी की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर घूम रहे बेसहारा गोवंशी के कारण आए दिन हादसे हो रहे हैं। इसी क्रम में सेक्टर-4 में पांच अगस्त को हुए हमले में गंभीर रूप से घायल सेवानिवृत्त कैप्टन जगराम की मंगलवार शाम उपचार के दौरान मौत हो गई। घटना के बाद सेक्टर-4 सहित आसपास के इलाकों में लोगों में भारी रोष है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बेसहारा गोवंशी की समस्या लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से स्थिति लगातार बिगड़ रही है।

जानकारी के अनुसार, पिछले पांच वर्षों के दौरान जिले में बेसहारा गोवंशी के हमले से यह पांचवीं मौत बताई जा रही है। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। लोगों का कहना है कि सड़कों पर खुले घूम रहे गोवंशी न केवल यातायात के लिए खतरा बने हुए हैं, बल्कि पैदल चलने वाले लोगों और दोपहिया वाहन चालकों पर भी हमला कर रहे हैं।

सब्जी मंडी से लौट रहे थे घर

सेक्टर-4 निवासी सेवानिवृत्त कैप्टन जगराम पांच अगस्त की शाम स्कूटी से सब्जी मंडी गए थे। खरीदारी करने के बाद वह स्कूटी से अपने घर की ओर लौट रहे थे। इसी दौरान रास्ते में दो बेसहारा गोवंशी ने उन पर हमला कर दिया।

अचानक हुए हमले से जगराम संभल नहीं सके और गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद आसपास मौजूद लोगों ने उनकी मदद की और उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया। गंभीर चोटों के कारण उनका उपचार चल रहा था। परिजन भी उनके जल्द स्वस्थ होने की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन मंगलवार शाम उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।

सेवानिवृत्त कैप्टन की मौत की खबर मिलते ही इलाके में शोक के साथ आक्रोश का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों ने बेसहारा गोवंशी की समस्या को लेकर प्रशासन और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।

पांच साल में पांचवीं मौत

बेसहारा गोवंशी के हमले से जिले में मौत का यह कोई पहला मामला नहीं है। पिछले पांच वर्षों में ऐसी घटनाओं में पांच लोगों की जान जाने की बात सामने आई है। लगातार हो रही मौतों के बावजूद सड़कों पर बेसहारा गोवंशी की मौजूदगी कम नहीं हो रही है।

शहर के कई इलाकों में सड़कों, बाजारों, गलियों और सार्वजनिक स्थानों पर गोवंशी झुंड के रूप में घूमते नजर आते हैं। कई बार ये सड़क के बीचोंबीच बैठ जाते हैं, जिससे वाहन चालकों को अचानक ब्रेक लगाना पड़ता है। इससे दुर्घटना का खतरा बना रहता है।

वहीं, जब गोवंशी झुंड में होते हैं तो उनके अचानक आक्रामक होने की स्थिति में राहगीरों के लिए बचना मुश्किल हो जाता है। सेवानिवृत्त कैप्टन जगराम के साथ हुई घटना ने एक बार फिर इस गंभीर समस्या को सामने ला दिया है।

स्थानीय लोगों में आक्रोश

हादसे के बाद सेक्टर-4 और आसपास के लोगों में रोष है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बेसहारा गोवंशी को पकड़ने और सुरक्षित स्थानों पर रखने के लिए समय-समय पर अभियान चलाए जाने की जरूरत है। इसके बावजूद सड़कों पर इनकी संख्या लगातार दिखाई देती है।

लोगों का आरोप है कि समस्या पर केवल हादसा होने के बाद ध्यान दिया जाता है। उनका कहना है कि यदि समय रहते बेसहारा गोवंशी को सड़कों से हटाकर उचित स्थान पर रखने की व्यवस्था की जाए तो इस तरह की घटनाओं को रोका जा सकता है।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि सेक्टर-4 समेत पूरे शहर में अभियान चलाकर सड़कों पर घूम रहे बेसहारा गोवंशी को हटाया जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि पकड़े गए गोवंशी दोबारा सड़कों पर न पहुंचें।

दोपहिया वाहन चालक सबसे अधिक जोखिम में

सड़कों पर बेसहारा गोवंशी की मौजूदगी से सबसे ज्यादा खतरा दोपहिया वाहन चालकों को रहता है। स्कूटी या बाइक से गुजरते समय यदि अचानक कोई गोवंशी सामने आ जाए तो वाहन चालक के पास संभलने का समय बेहद कम होता है।

कई बार गोवंशी आपस में लड़ते हुए सड़क पर आ जाते हैं या अचानक वाहन के सामने दौड़ पड़ते हैं। ऐसे में चालक के गिरने और गंभीर रूप से घायल होने की आशंका रहती है।

सेवानिवृत्त कैप्टन जगराम के मामले में भी वह स्कूटी से घर लौट रहे थे और रास्ते में दो गोवंशी ने उन पर हमला कर दिया। घटना ने शहर में सड़क सुरक्षा और बेसहारा पशुओं के प्रबंधन को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्थायी समाधान की मांग

स्थानीय लोगों का कहना है कि बेसहारा गोवंशी को केवल सड़क से हटाना पर्याप्त नहीं है। उनके लिए स्थायी व्यवस्था किए जाने की जरूरत है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि गोवंशी के लिए पर्याप्त क्षमता वाले आश्रय स्थल विकसित किए जाएं और वहां चारा-पानी समेत जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

इसके साथ ही शहर में नियमित निगरानी और ऐसे स्थानों की पहचान की जानी चाहिए जहां बड़ी संख्या में बेसहारा गोवंशी जमा होते हैं। संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय से इस समस्या पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।

हादसे के बाद फिर उठे सवाल

सेवानिवृत्त कैप्टन जगराम की मौत के बाद एक बार फिर शहर में बेसहारा गोवंशी की समस्या चर्चा के केंद्र में आ गई है। पिछले पांच वर्षों में पांच मौतों की बात सामने आने के बाद लोग अब ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

लोगों का कहना है कि जब तक सड़कों पर बेसहारा गोवंशी की आवाजाही पूरी तरह नियंत्रित नहीं होगी, तब तक ऐसे हादसों का खतरा बना रहेगा। जगराम की मौत ने शहरवासियों को झकझोर दिया है और प्रशासन से इस समस्या के स्थायी समाधान की उम्मीद बढ़ गई है।

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