थाली-कटोरी और चम्मच बने सुरक्षा का खतरा, जेलों में स्टील बर्तनों पर रोक
जेल में चम्मच भी बन सकता है हथियार
चंडीगढ़: हरियाणा की जेलों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए बड़ा बदलाव किया जा रहा है। बंदियों को भोजन के लिए दिए जाने वाले स्टील के चम्मच, थाली और कटोरी चरणबद्ध तरीके से हटाए जाएंगे। इनकी जगह मजबूत पॉलीकार्बोनेट के बर्तन दिए जाएंगे। जेल प्रशासन को आशंका है कि स्टील के बर्तनों को तोड़कर या उनके किनारों को घिसकर धारदार हथियार बनाया जा सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक हरियाणा की 20 जेलों में करीब 27,500 बंदी हैं, जबकि इनकी स्वीकृत क्षमता करीब 22 हजार है। पहले चरण में करीब 1,100 महिला बंदियों और 900 से 1,000 चक्की बंदियों को नए बर्तन उपलब्ध कराए जा चुके हैं। अब सामान्य बैरकों में बंद कैदियों के लिए भी पॉलीकार्बोनेट के बर्तनों की मांग भेजी गई है।
जेल प्रशासन की चिंता की बड़ी वजह स्टील के बर्तनों का संभावित दुरुपयोग है। रिपोर्ट के अनुसार पिछले तीन वर्षों में प्रदेश की जेलों में 150 से ज्यादा हस्तनिर्मित नुकीली वस्तुएं बरामद हुई हैं। इनमें स्टील के बर्तनों से तैयार किए गए हथियार भी शामिल बताए गए हैं।
हाल में दिल्ली की रोहिणी जेल में एक विचाराधीन कैदी की बर्तन से बनाए गए धारदार हथियार से हत्या का मामला भी सामने आया था। इस घटना ने जेलों के भीतर रोजमर्रा की वस्तुओं के हथियार के रूप में इस्तेमाल के खतरे को फिर चर्चा में ला दिया। हरियाणा में तीन केंद्रीय और 17 जिला जेल हैं। सभी बंदियों को नई व्यवस्था के तहत बर्तन उपलब्ध कराने पर करीब 50 से 60 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। एक बंदी के लिए थाली, कटोरी और गिलास की किट की अनुमानित कीमत 180 से 220 रुपये बताई गई है।
हरियाणा सरकार ने हाल में जेलों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए आधुनिक निगरानी और अन्य तकनीकी व्यवस्थाओं को मजबूत करने की जानकारी भी दी थी। 1 अगस्त 2026 तक प्रदेश की जेलों में 26,860 बंदी दर्ज थे और सरकार ने क्षमता बढ़ाने के लिए नई जेलों के निर्माण की योजनाओं का भी उल्लेख किया था। अब स्टील के बर्तनों को हटाने की प्रक्रिया भी इसी सुरक्षा कवायद का हिस्सा है। इसका उद्देश्य जेलों के भीतर ऐसी वस्तुओं की उपलब्धता कम करना है, जिन्हें बदलकर या धारदार बनाकर झगड़े के दौरान हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।