Haryana गुरुवार सुबह हुई भारी बारिश ने पूरे इलाके में किसानों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। अनाज मंडियों में धान का स्टॉक भीग गया है, और कई इलाकों में खड़ी फसलें ज़मीन पर गिर गई हैं। पिछले पांच दिनों में यह दूसरी बार है जब भारी बारिश हुई है, जिससे फसल के नुकसान, अनाज की गुणवत्ता खराब होने और खरीद प्रक्रिया में देरी को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं। जो किसान कई दिनों से अपनी उपज बिकने का इंतज़ार कर रहे थे, उनका कहना है कि ताज़ा बारिश ने काम-काज को और बाधित कर दिया है। धान खुले में पड़ा होने के कारण, अनाज की गुणवत्ता खराब होने का डर और बढ़ गया है।
किसानों का आरोप है कि जहां नीलाम हो चुके धान और बोरियों में पैक किए गए स्टॉक को शेड के नीचे रखा गया था, वहीं उनकी उपज बारिश में भीगती रही। उन्होंने नुकसान के लिए मुआवजे की मांग की है और खरीद के लिए तय नमी की सीमा (मॉइस्चर लिमिट) में ढील देने की अपील की है। हरियाणा आढ़तिया एसोसिएशन के चेयरमैन रजनीश चौधरी ने बताया कि बारिश ने धान की गुणवत्ता पर बहुत बुरा असर डाला है। जिन किसानों को पहले प्रति एकड़ 30-32 क्विंटल पैदावार मिल रही थी, उन्हें अब कुछ मामलों में केवल 25-26 क्विंटल ही उपज मिल रही है।
उन्होंने आगे कहा कि जिन किसानों ने पहले ही कम दाम पर अपनी उपज बेच दी है, उन्हें और भी नुकसान उठाना पड़ सकता है, क्योंकि राइस मिलर बारिश से खराब हुए धान के लिए और भी कम दाम दे सकते हैं। एक अन्य आढ़तिया, बग्गा सिंह संधू ने खरीद प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाने के लिए और अधिक राइस मिलरों को शामिल करने की मांग की। उन्होंने बताया कि करनाल की अनाज मंडियों में काम कर रहे मिलरों की संख्या पिछले साल इसी अवधि की तुलना में काफी कम है। उन्होंने कहा, "अगर इस प्रक्रिया में और अधिक मिलरों को शामिल किया जाए, तो खरीद और उठान (लिफ्टिंग) में तेज़ी आएगी, मंडी में जगह खाली होगी और किसान जल्दी अपने घर लौट सकेंगे।" एक अन्य आढ़तिया, नरेंद्र कुमार ने मांग की कि जिन किसानों की उपज भीग गई है, उन्हें राहत देने के लिए खरीद के समय नमी की स्वीकार्य सीमा को 17 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत कर दिया जाए।
किसान पाला राम ने बताया कि खरीद प्रक्रिया, जो पहले से ही धीमी चल रही थी, बारिश के बाद पूरी तरह से रुक गई है। करनाल अनाज मंडी में दो एकड़ की फसल लेकर आए सुरेंद्र कुमार ने बताया कि उनकी पूरी उपज भीग गई है। इससे न केवल उनकी मजदूरी का खर्च बढ़ गया है, बल्कि अब यह भी अनिश्चित हो गया है कि खरीदार इसे खरीदेंगे या नहीं। कुटैल के एक किसान, शिव कुमार ने बताया कि पैदावार कम होने, कंबाइन हार्वेस्टर ऑपरेटरों द्वारा ज्यादा शुल्क लेने और अनाज मंडियों में कम दाम मिलने की वजह से छोटे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। उन्होंने सरकार से मौसम की वजह से हुए नुकसान का आकलन करने और प्रभावित किसानों को मुआवजा देने की मांग की।
आढ़तियों ने राइस मिलरों की कमी का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि इससे अनाज की खरीद और उसे वहां से उठाने (लिफ्टिंग) के काम में रुकावट आ रही है। एक अन्य आढ़ती, रमेश ने बताया कि मंडी में केवल चार-पांच मिलर ही काम कर रहे हैं। उन्होंने प्रतिस्पर्धा बढ़ाने और किसानों को बेहतर दाम दिलाने के लिए मिलरों की संख्या बढ़ाने की मांग की।
इस बीच, अनाज मंडियों में बोरियों में पैक किया गया खरीदा हुआ धान भी बारिश में भीग गया। किसानों का आरोप है कि जिन फसलों की नीलामी पहले ही खरीद एजेंसियों या राइस मिलरों को हो चुकी थी, उन्हें तो शेड के नीचे रखा गया, जबकि किसानों का अपना स्टॉक बारिश में खुला छोड़ दिया गया। संपर्क करने पर, करनाल स्थित हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड (HSAMB) के एक अधिकारी ने बताया कि अनाज मंडियों में पर्याप्त तिरपाल मौजूद हैं और बारिश के दौरान धान के लगभग सभी ढेरों को ढक दिया गया था।
उन्होंने कहा, "किसी भी किसान को कोई परेशानी नहीं हुई है।"
यमुनानगर की मंडियों में भी कुछ ऐसे ही हालात हैं। जिले की अनाज मंडियों में तिरपाल से ढके होने के बावजूद, भारी मात्रा में धान गुरुवार को हुई बारिश में भीग गया। इससे किसानों और आढ़तियों को चिंता सता रही है कि कहीं अनाज की गुणवत्ता खराब न हो जाए। खरीद और लिफ्टिंग की धीमी गति के कारण स्थिति और बिगड़ गई है, जिससे भारी मात्रा में अनाज खराब मौसम की मार झेलने के लिए खुला पड़ा है। यमुनानगर के जिला खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले नियंत्रक के पास मौजूद ताजा आंकड़ों के अनुसार, लगभग 31,306 मीट्रिक टन धान अभी भी नहीं बिका है, जबकि खरीदा गया 78,895 मीट्रिक टन धान मंडियों से उठाए जाने का इंतजार कर रहा है।
14 अक्टूबर तक जिले की अनाज मंडियों में कुल 1,67,610 मीट्रिक टन धान पहुंचा था। इसमें से 1,36,304 मीट्रिक टन धान की खरीद तो हो गई, लेकिन अब तक केवल 78,895 मीट्रिक टन धान ही मंडियों से उठाया जा सका है।