Karnal हरियाणा सरकार के नए व्हीकल-ट्रैकिंग सिस्टम में तकनीकी दिक्कतों और लंबी प्रक्रियाओं की वजह से करनाल ज़िले में धान उठाने का काम धीमा हो गया है। इससे धान की धीमी खरीद और राइस मिलर्स की कम भागीदारी के बीच मजबूरी में धान बेचने (डिस्ट्रेस सेल) की आशंकाएं बढ़ गई हैं।
ज़िले में अब तक कुल 2,08,144 मीट्रिक टन (MT) धान की खरीद हुई है, जिसमें से सिर्फ़ 92,033 MT यानी लगभग 44% धान ही उठाया जा सका है। ट्रांसपोर्टरों और आढ़तियों का कहना है कि GPS कनेक्टिविटी की समस्याओं और गेट पास बनाने में देरी के कारण खरीदे गए धान को ले जाने में रुकावट आ रही है। उनका कहना है कि निगरानी बेहतर करने और भ्रष्टाचार रोकने के लिए शुरू किए गए इस सिस्टम को सुव्यवस्थित करने की ज़रूरत है ताकि कामकाज में कोई बाधा न आए। ट्रांसपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक खुराना ने बताया कि इस सिस्टम में धान ले जाने वाले वाहनों को ट्रैक करने के लिए अनाज मंडियों और राइस मिलों की जियो-फेंसिंग की जाती है।
उन्होंने कहा कि GPS कनेक्टिविटी में बार-बार आने वाली दिक्कतों की वजह से ऑनलाइन पोर्टल पर ट्रक असल में मौजूद होने के बावजूद 'इनएक्टिव' (निष्क्रिय) दिख सकते हैं। मिल कर्मचारियों द्वारा समय पर 'इनवर्ड गेट पास' न बनाने से भी देरी होती है, जिससे आगे के ट्रिप रुक जाते हैं।
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