Hisar जींद ज़िले के संगतपुरा गाँव की रहने वाली 26 साल की नीरू ढांडा को कामयाबी हासिल करने से कोई नहीं रोक पाया—चाहे वह बरामदे में बँधी भैंसों वाला एक कमरे का घर हो, शूटिंग के ज़्यादा खर्च को लेकर पिता की हिचकिचाहट हो, या फिर डेंगू की बीमारी जिसके कारण उन्हें दिल्ली के अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। उन्होंने महिलाओं के व्यक्तिगत ट्रैप शूटिंग इवेंट में गोल्ड मेडल जीता और ऐसा करने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। उनकी माँ सुदेश देवी BPL स्कीम के तहत राशन लेने के लिए लाइन में खड़ी थीं, तभी उन्हें फ़ोन आया कि उनकी बेटी ने गोल्ड मेडल जीत लिया है।
इस कामयाबी से खुश सुदेश ने कहा कि नीरू को हमेशा अपने प्रदर्शन पर भरोसा था। सुदेश ने कहा, "हम एक कमरे के घर में रहते हैं और भैंस का दूध बेचकर गुज़ारा करते हैं। लेकिन नीरू ने कभी शिकायत नहीं की और हमेशा कहती थी कि जल्द ही हमारा अपना बड़ा घर और कार होगी। अब वह ओलंपिक गोल्ड जीतने का लक्ष्य बना रही है।" नीरू की इस शानदार कामयाबी से परिवार और गाँव वाले बहुत खुश हैं। गाँव की सरपंच सोनिया के पति सुनील कुमार ने कहा, "पूरे गाँव को उस पर गर्व है। जब वह वापस आएगी तो हम उसके सम्मान में एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित करेंगे।"
एशियाई खेलों से पहले जब वह बीमार पड़ीं तो परिवार को चिंता हुई। उनकी माँ ने कहा, "उन्हें डेंगू हो गया था और दिल्ली के अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इस वजह से एशियाई खेलों के लिए उनके जाने में चार दिन की देरी हो गई।" शुरू में, नीरू के किसान पिता सुरेश ढांडा शूटिंग के ज़्यादा खर्च के कारण उन्हें शूटिंग करने देने में हिचकिचा रहे थे। सुदेश ने कहा, "हालाँकि, हम अपने रिश्तेदार सोमबीर पहलवान के शुक्रगुज़ार हैं, जिनके बेटे लक्ष्य श्योराण भी एक कॉम्पिटिटिव शूटर हैं। उन्होंने न सिर्फ़ नीरू का हौसला बढ़ाया, बल्कि 2019 में जब उन्होंने प्रैक्टिस शुरू की तो ज़रूरी मदद भी दी।" हरियाणा के 'खापलैंड' के केंद्र, जींद ज़िला मुख्यालय से लगभग 6 किलोमीटर दूर स्थित संगतपुरा में हाल ही में खाप पंचायत ने लड़कियों की शादी से जुड़े फैसलों पर रोक लगाने वाला एक आदेश जारी किया। इसके बाद, नीरू इस इलाके की लड़कियों के लिए सशक्तिकरण की एक मज़बूत मिसाल बनकर उभरी हैं।
जब गाँव में लड़कियों और लड़कों के बीच भेदभाव के बारे में पूछा गया, तो सुदेश ने कहा, "बेटियाँ हर क्षेत्र में बेटों से कहीं आगे हैं। यह पूरे हरियाणा में लड़कियों की सफलता से साफ़ दिखता है। भगवान हर परिवार को नीरू जैसी बेटी दे।" नीरू का घर एक साधारण सा एक कमरे का मकान है, जिसमें सफेदी तक नहीं हुई है। कमरे की दीवारें नीरू के मेडल और यादगार चीज़ों से भरी हुई हैं। उनकी माँ ने कहा, "भले ही कमरे में रंग-रोगन न हुआ हो, लेकिन नीरू ने हमारी ज़िंदगी में रंग भर दिए हैं।"
नीरू ने शुरू से ही ज़बरदस्त हिम्मत दिखाई, जिसकी वजह से स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया द्वारा चुने जाने पर वह जल्द ही फरीदाबाद और बाद में मध्य प्रदेश चली गईं। उनकी माँ उन्हें लगभग 10 किलो घी के साथ बाजरे की रोटियाँ और चूरमा भेजती थीं, जिन्हें वह तीन-चार दिनों तक खाती थीं। पिछले साल नीरू को आर्मी मार्कसमैनशिप यूनिट में नायब सूबेदार के तौर पर चुना गया था। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने एशियाई खेलों में नीरू की जीत पर उन्हें बधाई दी है।