हरियाणा में उद्योगों को मिलेगी रफ्तार, राइट टू बिजनेस बिल का मसौदा तैयार

Update: 2026-07-21 12:47 GMT

हरियाणा: सरकार प्रदेश में उद्योग और व्यापार को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाने जा रही है। राज्य के उद्योग एवं वाणिज्य विभाग ने 'हरियाणा राइट टू बिजनेस विधेयक 2026' का प्रारूप तैयार कर लिया है। इस प्रस्तावित कानून का उद्देश्य सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को लालफीताशाही से राहत देना और नए कारोबार शुरू करने की प्रक्रिया को सरल बनाना है। संभावना है कि सरकार इसे विधानसभा के आगामी मानसून सत्र में पेश कर सकती है।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के निर्देश पर तैयार किए गए इस विधेयक में कारोबारियों को कई बड़ी सुविधाएं देने का प्रावधान किया गया है। इसके तहत पात्र विनिर्माण इकाइयों को शुरुआती स्तर पर विभागों की लंबी प्रक्रिया से राहत मिलेगी। उद्यमी केवल स्व-घोषणा (Self Declaration) के आधार पर सैद्धांतिक स्वीकृति प्रमाण-पत्र प्राप्त कर सकेंगे।

सरकार का उद्देश्य है कि नए उद्योगों को स्थापित करने में लगने वाले समय को कम किया जाए और निवेशकों को बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। इस कानून के लागू होने के बाद नए उद्योग बिना प्रशासनिक देरी के तेजी से अपना काम शुरू कर सकेंगे।

प्रस्तावित विधेयक में नए उद्योगों को शुरुआती तीन वर्षों तक निरीक्षण से छूट देने का भी प्रावधान रखा गया है। इसके अनुसार, विभिन्न सरकारी विभाग स्थापना के शुरुआती तीन साल तक नए उद्यमों का नियमित निरीक्षण नहीं करेंगे। इससे उद्यमियों को कारोबार स्थापित करने और उत्पादन शुरू करने पर अधिक ध्यान देने का अवसर मिलेगा।

हरियाणा सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया को बेहतर तरीके से लागू करने के लिए हरियाणा एंटरप्राइजेज प्रमोशन सेंटर को राज्य स्तरीय नोडल एजेंसी बनाने का निर्णय लिया है। इसके अलावा जिला स्तर पर स्वीकृति समितियां भी गठित की जाएंगी, जो उद्योगों को समयबद्ध मंजूरी दिलाने में मदद करेंगी।

सरकार का मानना है कि यह विधेयक प्रदेश में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को और मजबूत करेगा। इससे न केवल पुराने उद्योगों को लाभ मिलेगा, बल्कि नए स्टार्टअप और युवा उद्यमियों को भी कारोबार शुरू करने में आसानी होगी।

हरियाणा के उद्योग मंत्री राव नरबीर ने कहा कि यह नया कानून प्रदेश में उद्योग लगाने वाले लोगों और स्टार्टअप के लिए बड़ा बदलाव साबित होगा। उन्होंने कहा कि कारोबार शुरू करते समय उद्यमियों को जिन प्रशासनिक परेशानियों का सामना करना पड़ता था, उन्हें कम करने का प्रयास किया जा रहा है। इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और राज्य में औद्योगिक गतिविधियों को गति मिलेगी।

उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित कुमार अग्रवाल के अनुसार, नई व्यवस्था से कागजी कार्रवाई और मंजूरी में लगने वाला समय काफी कम होगा। इससे परियोजनाओं की लागत घटेगी और उद्योग जल्द शुरू हो सकेंगे। सिंगल विंडो क्लीयरेंस व्यवस्था के जरिए प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जाएगा।

सरकार को उम्मीद है कि इस विधेयक के लागू होने से प्रदेश में नए निवेश के अवसर बढ़ेंगे। छोटे और मध्यम उद्योगों को मजबूती मिलेगी तथा स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। हरियाणा सरकार इसे औद्योगिक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मान रही है।

इस कानून के जरिए सरकार का लक्ष्य है कि हरियाणा को व्यापार और निवेश के लिए और अधिक आकर्षक बनाया जाए, जहां उद्यमियों को कम समय में सुविधाएं मिल सकें और उद्योग तेजी से आगे बढ़ सकें।

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