रेवाड़ी: त्योहारी सीजन में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए रेवाड़ी में जांच अभियान चलाया जा रहा है। मुख्यमंत्री उड़नदस्ता और खाद्य सुरक्षा विभाग की संयुक्त टीम ने बुधवार को नई अनाजमंडी की दो दुकानों पर जांच की। इस दौरान कुट्टू के आटे, सामक और साबूदाने के नमूने लिए गए। इन्हें गुणवत्ता परीक्षण के लिए करनाल स्थित प्रयोगशाला भेजा गया है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल नमूने लिए जाने से संबंधित खाद्य पदार्थों में मिलावट की पुष्टि नहीं हुई है। 
जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी संदीप कुमार के अनुसार, मंगलवार को भी जिले के विभिन्न स्थानों पर सैंपलिंग की गई थी। कुंड में खोया और कलाकंद, कुतुबपुर में खोया तथा डहीना की चार दुकानों से बर्फी, खोया, पनीर, जूस और चायपत्ती के नमूने लिए गए। सीहा से रसगुल्ले का सैंपल भी लिया गया। विभाग ने विक्रेताओं को गुणवत्ता बनाए रखने की चेतावनी दी है। उपभोक्ताओं से दूध से बने उत्पाद खरीदते समय रंग, तैयार करने की तारीख और समाप्ति तिथि जैसी जानकारियों पर ध्यान देने की अपील की गई है।  जिले में व्रत के दौरान इस्तेमाल होने वाले खाद्य पदार्थ भी जांच के दायरे में हैं। इससे पहले नौ अक्टूबर को खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की टीम ने शहर के कटला, गंज और गुड़ बाजार के साथ बावल में परचून की दुकानों की जांच की थी। उस कार्रवाई में कुल सात सैंपल लिए गए थे। इनमें कुट्टू के दो, सामक के दो, सिंघाड़े के आटे के दो और साबूदाने का एक नमूना शामिल था। सभी नमूनों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया था। 
विभाग के मुताबिक, नवरात्र के दौरान इन खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ जाती है। इसलिए दुकानों पर उपलब्ध सामग्री की गुणवत्ता जांची जा रही है। प्रयोगशाला परीक्षण से पता चलेगा कि नमूने निर्धारित गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों पर खरे उतरते हैं या नहीं। अधिकारियों ने दुकानदारों से मानकों का पालन करने और उपभोक्ताओं से पैकिंग पर लिखी जानकारी देखकर सामग्री खरीदने की अपील की है। जांच में मिलावट अथवा गुणवत्ता संबंधी खामी मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई करने की बात कही गई है।दूध से बने उत्पादों की आपूर्ति पर भी निगरानी रखी जा रही है। दस अक्टूबर को भूड़ला गांव में दो पिकअप वाहनों से लाए गए लगभग 542 किलोग्राम संदिग्ध पनीर के खिलाफ कार्रवाई हुई थी। गुणवत्ता सही नहीं पाए जाने पर पनीर को नष्ट कराया गया। यह कार्रवाई वर्तमान दुकान जांच से अलग थी। जिले में त्योहारों के लिए पहुंच रहे खाद्य पदार्थों के साथ बाजार में पहले से उपलब्ध सामग्री को भी जांच अभियान में शामिल किया जा रहा है। 
सितंबर के अंतिम सप्ताह में भी विभाग ने कई स्थानों पर कार्रवाई की थी। 29 सितंबर को सामने आए विवरण के मुताबिक, उससे पहले के दो सप्ताह में रेवाड़ी शहर, बावल और कोसली सहित अन्य क्षेत्रों से देसी घी, पनीर तथा खोये के 20 सैंपल लिए गए थे। अलग-अलग कार्रवाइयों में 480 किलोग्राम घी सीज किया गया था और 940 किलोग्राम पनीर नष्ट कराया गया था। इन पुराने आंकड़ों को बुधवार की नई अनाजमंडी में हुई सैंपलिंग से अलग समझना जरूरी है। 
खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने पहले भी बताया था कि विभाग की टीमें डेयरी, दुकानों और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों की जांच करती रहेंगी। दूध से बने उत्पादों में विशेष रूप से पनीर, खोया और घी की गुणवत्ता पर ध्यान दिया जा रहा है। विभाग का कहना है कि त्योहारों में इन उत्पादों की मांग बढ़ने के कारण सैंपलिंग की जा रही है। खाद्य कारोबारियों से निर्धारित मानकों का पालन करने और उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण सामग्री उपलब्ध कराने की अपील की गई है। 
वर्तमान जांच में जुटाए गए नमूनों की रिपोर्ट आने के बाद संबंधित उत्पादों की गुणवत्ता की स्थिति स्पष्ट होगी। विभाग ने रिपोर्ट के अनुसार विभागीय और कानूनी कार्रवाई की बात कही है। अभी किसी दुकान से नमूना लिया जाना अपने आप में मिलावट का प्रमाण नहीं है। नई अनाजमंडी सहित विभिन्न क्षेत्रों से लिए गए खाद्य नमूनों के वैज्ञानिक परीक्षण के नतीजे आगे की कार्रवाई का आधार बनेंगे।
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